रोहितश्य रॉय झारखंड के महाधिवक्ता नियुक्त: अनुच्छेद 165, नियुक्ति और कार्यकाल के महत्वपूर्ण तथ्य

Posted on: 14 June 2026 | Category: Appointments

14 जून 2026 को रोहितश्य रॉय झारखंड के महाधिवक्ता नियुक्त हुए। यह संविधान के अनुच्छेद 165 से जुड़ा संवैधानिक पद है, सामान्य नियुक्ति-पत्र वितरण नहीं।

रोहितश्य रॉय झारखंड के महाधिवक्ता नियुक्त: अनुच्छेद 165, नियुक्ति और कार्यकाल के महत्वपूर्ण तथ्य

झारखंड Current Affairs — 2026-06-14: यह लेख जून 2026 की राज्य-विशिष्ट घटना, उसके प्रशासनिक/कानूनी संदर्भ और JSSC/JPSC Prelims–Mains के लिए प्रासंगिक स्थायी सामान्य ज्ञान पर केंद्रित है।

मुख्य तथ्य (Highlights):
  • नियुक्त व्यक्ति: रोहितश्य रॉय (Rohitashya Roy)।
  • नियुक्ति तिथि: 14 जून 2026; आधिकारिक महाधिवक्ता कार्यालय प्रोफाइल में दर्ज।
  • विधि विभाग की अधिसूचना: पत्रांक 1341, दिनांक 14 जून 2026।
  • पद: Advocate General / महाधिवक्ता, झारखंड।
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 165।
  • नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और पात्रता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता से जुड़ी है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ:
  • 14 जून 2026 – नियुक्ति की अधिसूचना/आधिकारिक नियुक्ति तिथि।
  • 15 जून 2026 – मंत्रिपरिषद की बैठक में नियुक्ति को घटनोत्तर स्वीकृति की रिपोर्ट।

महाधिवक्ता की संवैधानिक स्थिति

अनुच्छेद 165 के अनुसार प्रत्येक राज्य का एक महाधिवक्ता होता है। राज्यपाल किसी ऐसे व्यक्ति को महाधिवक्ता नियुक्त करता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए योग्य हो। महाधिवक्ता राज्य सरकार को विधिक मामलों में सलाह देता है।

कार्यकाल और विधानमंडल में भूमिका

महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। अनुच्छेद 177 के अनुसार उसे राज्य विधानमंडल की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, लेकिन केवल इस पद के आधार पर वोट का अधिकार नहीं मिलता।

अटॉर्नी जनरल और एडवोकेट जनरल में अंतर

भारत का महान्यायवादी (Attorney General for India) अनुच्छेद 76 से संबंधित केंद्रीय पद है, जबकि राज्य का महाधिवक्ता अनुच्छेद 165 का पद है।

JSSC/JPSC के लिए महत्वपूर्ण Static GK:
  • अनुच्छेद 165 – महाधिवक्ता।
  • अनुच्छेद 177 – विधानमंडल में मंत्री और महाधिवक्ता के अधिकार।
  • अनुच्छेद 76 – भारत का महान्यायवादी।
  • महाधिवक्ता को राज्यपाल नियुक्त करता है; उसे अनिवार्य रूप से विधायक होना आवश्यक नहीं।
  • महाधिवक्ता कोई न्यायाधीश नहीं, राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी है।

JSSC/JPSC परीक्षा में उपयोगिता

महाधिवक्ता का अनुच्छेद, नियुक्ति, योग्यता, प्रसादपर्यंत कार्यकाल एवं राज्य विधानमंडल में अधिकार JPSC Polity के स्थायी महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।

महत्वपूर्ण MCQs — उत्तर और व्याख्या सहित

प्रश्न 1. जून 2026 में झारखंड के महाधिवक्ता किसे नियुक्त किया गया?
(A) रोहितश्य रॉय
(B) पंकज मित्तल
(C) सतीश चंद्र दुबे
(D) राजेश शंकर
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) रोहितश्य रॉय

व्याख्या: महाधिवक्ता कार्यालय के अनुसार रोहितश्य रॉय की नियुक्ति 14 जून 2026 को हुई।

प्रश्न 2. राज्य के महाधिवक्ता की व्यवस्था संविधान के किस अनुच्छेद में है?
(A) अनुच्छेद 76
(B) अनुच्छेद 165
(C) अनुच्छेद 280
(D) अनुच्छेद 324
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) अनुच्छेद 165

व्याख्या: अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता से संबंधित है।

प्रश्न 3. राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति कौन करता है?
(A) मुख्य न्यायाधीश
(B) राष्ट्रपति
(C) राज्यपाल
(D) विधानसभा अध्यक्ष
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) राज्यपाल

व्याख्या: अनुच्छेद 165 में नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल को है।

प्रश्न 4. राज्य विधानमंडल में महाधिवक्ता के बोलने एवं भाग लेने के अधिकार का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
(A) अनुच्छेद 177
(B) अनुच्छेद 110
(C) अनुच्छेद 148
(D) अनुच्छेद 21A
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) अनुच्छेद 177

व्याख्या: अनुच्छेद 177 यह अधिकार देता है, लेकिन पद मात्र से मतदान अधिकार नहीं मिलता।

प्रश्न 5. भारत के महान्यायवादी के लिए कौन-सा अनुच्छेद लागू होता है?
(A) 165
(B) 177
(C) 76
(D) 312
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) 76

व्याख्या: अनुच्छेद 76 भारत के Attorney General से संबंधित है।

प्रश्न 6. महाधिवक्ता का सामान्य संवैधानिक कार्यकाल कैसा होता है?
(A) निश्चित 6 वर्ष
(B) राज्यपाल के प्रसादपर्यंत
(C) अनिवार्य 5 वर्ष
(D) जीवनपर्यंत
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) राज्यपाल के प्रसादपर्यंत

व्याख्या: अनुच्छेद 165 के अंतर्गत वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है।

स्रोत और संदर्भ

संपादकीय नोट: किसी प्रस्ताव, निर्णय या शिलान्यास को वास्तविक क्रियान्वयन/कार्य-समापन के बराबर न मानें। संबंधित घटना के समय की स्थिति और बाद के परिवर्तनों को अलग पढ़ें।

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