MCQs for JSSC TGT Exam

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MCQs for JSSC TGT Exam

श्रेणी: | परीक्षा: JSSC TGT Exam

81
Hindi Vocabulary • Antonyms
“उत्तर” का विलोम चुनिए। “उत्तर” का विलोम चुनिए।
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: C Correct Answer: C
“उत्तर” का विलोम “दक्षिण” है।
“उत्तर” का विलोम “दक्षिण” है।
82
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

घर-बार किसने छोड़ा था?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

घर-बार किसने छोड़ा था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
गद्यांश के अनुसार, सोमा बुआ के पति ने घर-बार छोड़ दिया था।
गद्यांश के अनुसार, सोमा बुआ के पति ने घर-बार छोड़ दिया था।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ किसके घर काम कर उनके उत्सव को व्यवस्थित करती थीं?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ किसके घर काम कर उनके उत्सव को व्यवस्थित करती थीं?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में सोमा बुआ ने सारा काम संभाला था।
किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में सोमा बुआ ने सारा काम संभाला था।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ के पति साल में कितने महीने उनके पास रहते थे?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ के पति साल में कितने महीने उनके पास रहते थे?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: A Correct Answer: A
सोमा बुआ के पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे।
सोमा बुआ के पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ के पति उन्हें कितने महीने छोड़कर रहते थे?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ के पति उन्हें कितने महीने छोड़कर रहते थे?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
पति के आने के एक महीने को छोड़कर शेष ग्यारह महीने वे अलग रहते थे।
पति के आने के एक महीने को छोड़कर शेष ग्यारह महीने वे अलग रहते थे।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

शेष ग्यारह महीने सोमा बुआ किसके दुःख-सुख को अपना मानती थीं?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

शेष ग्यारह महीने सोमा बुआ किसके दुःख-सुख को अपना मानती थीं?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
सोमा बुआ पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में भाग लेती थीं।
सोमा बुआ पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में भाग लेती थीं।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ के घर में किसका देहांत हो गया था?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ के घर में किसका देहांत हो गया था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: C Correct Answer: C
गद्यांश में सोमा बुआ के बेटे की मृत्यु का उल्लेख है।
गद्यांश में सोमा बुआ के बेटे की मृत्यु का उल्लेख है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

बेकारी कौन थीं?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

बेकारी कौन थीं?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
गद्यांश में सोमा बुआ को अकेली और बेचारी स्थिति में बताया गया है।
गद्यांश में सोमा बुआ को अकेली और बेचारी स्थिति में बताया गया है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

“छाती फाड़-फाड़कर काम करना” मुहावरे का अर्थ क्या है?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

“छाती फाड़-फाड़कर काम करना” मुहावरे का अर्थ क्या है?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: A Correct Answer: A
इसका अर्थ बहुत मेहनत और लगन से काम करना है।
इसका अर्थ बहुत मेहनत और लगन से काम करना है।
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गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए किसका सहारा लेती थीं?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए किसका सहारा लेती थीं?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: D Correct Answer: D
वे अपने आस-पास के पड़ोसियों का सहारा लेती थीं।
वे अपने आस-पास के पड़ोसियों का सहारा लेती थीं।

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