111 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास के पास किसने अपना पैसा जमा किया था? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास के पास किसने अपना पैसा जमा किया था? A. बालक बालक B. अंगी अंगी C. सेठ सेठ D. काशी के व्यापारी लोग काशी के व्यापारी लोग उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D गद्यांश के अनुसार, काशी के व्यापारी लोग अपना धन सेठ बनारसीदास के पास जमा करते थे। गद्यांश के अनुसार, काशी के व्यापारी लोग अपना धन सेठ बनारसीदास के पास जमा करते थे।
112 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।इनमें से कौन-सा गुण सेठ बनारसीदास के व्यक्तित्व से संबंधित नहीं है? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।इनमें से कौन-सा गुण सेठ बनारसीदास के व्यक्तित्व से संबंधित नहीं है? A. स्वार्थी स्वार्थी B. दयालु दयालु C. दानी दानी D. परोपकारी परोपकारी उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D सेठ बनारसीदास के व्यवहार में स्वार्थ था; उसे वास्तविक परोपकारी नहीं बताया गया है। सेठ बनारसीदास के व्यवहार में स्वार्थ था; उसे वास्तविक परोपकारी नहीं बताया गया है।
113 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास दिन के कितने बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास दिन के कितने बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था? A. पूरे पहर पूरे पहर B. सुबह सुबह C. दस बजे दस बजे D. बारह बजे बारह बजे उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D गद्यांश में बनारसीदास के दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगे रहने का उल्लेख है। गद्यांश में बनारसीदास के दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगे रहने का उल्लेख है।
114 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास किसके मोह के कारण स्वार्थी कहलाया? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास किसके मोह के कारण स्वार्थी कहलाया? A. माता-पिता माता-पिता B. भाई-बहन भाई-बहन C. चाचा-चाची चाचा-चाची D. पुत्र मोह पुत्र मोह उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D पुत्र के प्रति मोह के कारण बनारसीदास का स्वार्थी पक्ष सामने आता है। पुत्र के प्रति मोह के कारण बनारसीदास का स्वार्थी पक्ष सामने आता है।
115 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास कहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति थे? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास कहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति थे? A. हरिद्वार हरिद्वार B. ऋषिकेश ऋषिकेश C. काशी काशी D. मद्रास मद्रास उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C गद्यांश के अनुसार, सेठ बनारसीदास काशी के प्रसिद्ध व्यक्ति थे। गद्यांश के अनुसार, सेठ बनारसीदास काशी के प्रसिद्ध व्यक्ति थे।
116 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास ने किसकी धरोहर वापस देने से इंकार कर दिया? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास ने किसकी धरोहर वापस देने से इंकार कर दिया? A. बालक की बालक की B. सेठ लोगों की सेठ लोगों की C. भिखारी की भिखारी की D. डॉक्टर की डॉक्टर की उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C गद्यांश के अनुसार, बनारसीदास ने भिखारी की धरोहर लौटाने से इनकार किया था। गद्यांश के अनुसार, बनारसीदास ने भिखारी की धरोहर लौटाने से इनकार किया था।
117 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।खोया हुआ बालक कुछ समय तक किसके पास रहा होगा? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।खोया हुआ बालक कुछ समय तक किसके पास रहा होगा? A. सेठ के पास सेठ के पास B. बनारसीदास के पास बनारसीदास के पास C. भिखारिन के पास भिखारिन के पास D. डॉक्टर के पास डॉक्टर के पास उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C गद्यांश के संदर्भ से बालक के कुछ समय तक भिखारिन के पास रहने का संकेत मिलता है। गद्यांश के संदर्भ से बालक के कुछ समय तक भिखारिन के पास रहने का संकेत मिलता है।
118 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।अंगी भिखारिन किसे लेकर दोबारा बनारसीदास जी के घर आई थी? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।अंगी भिखारिन किसे लेकर दोबारा बनारसीदास जी के घर आई थी? A. पति को पति को B. माँ को माँ को C. काशी महाराज को काशी महाराज को D. बेटे को बेटे को उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D अंगी अपने बेटे को लेकर दोबारा बनारसीदास के घर आई थी। अंगी अपने बेटे को लेकर दोबारा बनारसीदास के घर आई थी।
119 Hindi Language • लिंग “शेर” का स्त्रीलिंग रूप इनमें से कौन-सा है? “शेर” का स्त्रीलिंग रूप इनमें से कौन-सा है? A. शेरा शेरा B. शेरी शेरी C. शेरा शेरा D. शेरनी शेरनी उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D “शेर” का स्त्रीलिंग रूप “शेरनी” है। “शेर” का स्त्रीलिंग रूप “शेरनी” है।
120 Hindi Language • विलोम शब्द “अमृत” का सही विलोम क्या है? “अमृत” का सही विलोम क्या है? A. चाय चाय B. जहर जहर C. विष विष D. रक्षा रक्षा उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C “अमृत” का विलोम “विष” है। “अमृत” का विलोम “विष” है।