झारखंड हाईकोर्ट का ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन संबंधी आदेश
13 अप्रैल 2026 को झारखंड उच्च न्यायालय
ने राज्य में ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस
(OCIs) के प्रबंधन और निगरानी
से संबंधित महत्वपूर्ण आदेश दिया।
न्यायालय ने राज्य सरकार को
चार सप्ताह के भीतर निगरानी समिति
गठित करने का निर्देश दिया।
प्रमुख तथ्य
- न्यायालय: झारखंड उच्च न्यायालय, रांची
- आदेश की तिथि: 13 अप्रैल 2026
- वाद संख्या: W.P. (PIL) No. 2273 of 2026
- मामला: Court on its Own Motion बनाम State of Jharkhand
- मुख्य न्यायाधीश: एम. एस. सोनक
- अन्य न्यायाधीश: राजेश शंकर
- समिति गठन की अवधि: चार सप्ताह
- अगली सुनवाई की निर्धारित तिथि: 11 जून 2026
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- 26 फरवरी 2026 — सुप्रीम कोर्ट का संबंधित निर्णय।
- 13 अप्रैल 2026 — झारखंड हाईकोर्ट का निगरानी समिति संबंधी आदेश।
- चार सप्ताह — समिति गठन की समयसीमा।
- 11 जून 2026 — मामले की अगली सुनवाई के लिए निर्धारित तिथि।
मामले की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने W.P. (C) No. 1082
of 2020 में 26 फरवरी 2026 को
ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस
के संबंध में निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को
अपने-अपने क्षेत्राधिकार में
इन निर्देशों के अनुपालन की
निरंतर निगरानी करने को कहा।
इसके अनुपालन में झारखंड हाईकोर्ट
में स्वतः संज्ञान से जनहित याचिका
दर्ज की गई।
ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन क्या है?
Open Correctional Institution (OCI)
कारागार सुधार से संबंधित व्यवस्था है,
जिसमें पात्र बंदियों के लिए
तुलनात्मक रूप से कम प्रतिबंधात्मक
वातावरण में सुधार और पुनर्वास
की सुविधाएँ विकसित की जाती हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य
सुधारात्मक दृष्टिकोण,
जिम्मेदारी और समाज में
पुनः समावेशन की संभावनाओं
को बढ़ावा देना है।
ओपन जेल और बंद कारागार में अंतर
| बंद कारागार |
ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन |
| सुरक्षा एवं आवागमन पर अधिक प्रतिबंध |
पात्र बंदियों के लिए तुलनात्मक रूप से कम प्रतिबंधात्मक व्यवस्था |
| मुख्य जोर कारावास और सुरक्षा व्यवस्था पर |
सुधार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन पर विशेष ध्यान |
| सामान्य कारागार प्रबंधन |
निर्धारित पात्रता और विशेष प्रशासनिक नियमों के अंतर्गत संचालन |
हाईकोर्ट द्वारा निर्देशित समिति
न्यायालय ने राज्य में OCIs
के प्रबंधन के लिए निगरानी
समिति गठित करने का निर्देश दिया।
समिति की संरचना
- राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके नामित व्यक्ति — अध्यक्ष।
- राज्य के गृह सचिव अथवा अतिरिक्त सचिव से नीचे के स्तर का नहीं होने वाला नामित अधिकारी।
- कारा विभाग के उप महानिरीक्षक से नीचे के स्तर का नहीं होने वाला वरिष्ठ अधिकारी।
समिति का नामित अध्यक्ष
उच्च न्यायालय का पूर्व न्यायाधीश
भी हो सकता है।
समिति के प्रमुख कार्य
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी।
- OCIs के उपयोग एवं संचालन की समीक्षा।
- पात्र बंदियों को बंद कारागार से OCI में स्थानांतरित करने की व्यवस्था पर ध्यान देना।
- OCIs के विस्तार की संभावनाओं का मूल्यांकन।
- कार्यान्वयन में प्रशासनिक बाधाओं की पहचान।
राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट
न्यायालय ने गृह सचिव के माध्यम
से अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत
करने का निर्देश दिया।
रिपोर्ट में निम्नलिखित
जानकारियाँ माँगी गईं:
- निगरानी समिति के गठन की स्थिति।
- झारखंड में OCIs की वर्तमान स्थिति।
- संस्थानों के प्रबंधन और संचालन का विवरण।
- राज्य में एक से अधिक OCI स्थापित करने की व्यवहार्यता।
स्वतः संज्ञान क्या है?
जब न्यायालय किसी मामले को
स्वयं संज्ञान में लेकर
न्यायिक कार्यवाही शुरू करता है,
तो उसे Suo Motu
कार्यवाही कहा जाता है।
Continuing Mandamus क्या है?
Continuing Mandamus ऐसी न्यायिक
कार्यवाही है जिसमें न्यायालय
किसी महत्वपूर्ण निर्देश के
क्रियान्वयन की स्थिति की
समय-समय पर समीक्षा करता है।
इससे आदेश जारी होने के बाद भी
अनुपालन पर न्यायिक निगरानी
जारी रह सकती है।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987
के अंतर्गत कार्य करने वाली व्यवस्था है।
झारखंड में इसे सामान्यतः
JHALSA
के नाम से जाना जाता है।
यह पात्र व्यक्तियों को
निःशुल्क विधिक सहायता और
विधिक जागरूकता से संबंधित
कार्य करता है।
संवैधानिक महत्व
कारागार सुधार और बंदियों
की मानवीय गरिमा का संबंध
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21
के व्यापक न्यायिक सिद्धांतों
से है।
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय
की रिट जारी करने की
शक्ति से संबंधित है।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण:
13 अप्रैल 2026 को निगरानी समिति
गठित करने का निर्देश दिया गया था।
इसका अर्थ यह नहीं है कि
उसी दिन समिति गठित हो गई
या सभी प्रस्तावित OCIs
कार्यशील हो गए।
JSSC/JPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
- आदेश — 13 अप्रैल 2026।
- वाद — W.P. (PIL) No. 2273 of 2026।
- समिति गठन — चार सप्ताह।
- समिति अध्यक्ष — राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या नामित व्यक्ति।
- अगली सुनवाई निर्धारित — 11 जून 2026।
- संबंधित सुप्रीम कोर्ट आदेश — 26 फरवरी 2026।
- OCI — Open Correctional Institution।
- महत्वपूर्ण अवधारणा — Continuing Mandamus।
महत्वपूर्ण MCQs
1. झारखंड हाईकोर्ट ने ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन संबंधी आदेश कब दिया?
(A) 11 अप्रैल 2026
(B) 13 अप्रैल 2026
(C) 15 अप्रैल 2026
(D) 20 अप्रैल 2026
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) 13 अप्रैल 2026
झारखंड हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल 2026 को W.P. (PIL) No. 2273 of 2026 में आदेश दिया।
2. निगरानी समिति गठित करने के लिए कितनी अवधि दी गई?
(A) दो सप्ताह
(B) चार सप्ताह
(C) आठ सप्ताह
(D) छह महीने
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) चार सप्ताह
न्यायालय ने चार सप्ताह में निगरानी समिति गठित करने का निर्देश दिया।
3. निगरानी समिति की अध्यक्षता किसे करनी थी?
(A) राज्यपाल
(B) राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके नामित व्यक्ति
(C) विधानसभा अध्यक्ष
(D) जिला कोषागार पदाधिकारी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B)
समिति के प्रमुख के रूप में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके नामित व्यक्ति का प्रावधान किया गया।
4. OCI का पूर्ण रूप क्या है?
(A) Open Correctional Institution
(B) Official Crime Investigation
(C) Online Court Institution
(D) Organised Correction Inspection
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) Open Correctional Institution
OCI कारागार सुधार और पात्र बंदियों के पुनर्वास से संबंधित व्यवस्था है।
5. Continuing Mandamus का क्या अर्थ है?
(A) आपराधिक मुकदमे का स्वतः समापन
(B) न्यायालय द्वारा निर्देशों के अनुपालन की निरंतर निगरानी
(C) सभी बंदियों की तत्काल रिहाई
(D) विधानसभा में नया विधेयक प्रस्तुत करना
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B)
Continuing Mandamus में न्यायालय आदेशों के क्रियान्वयन की निरंतर निगरानी करता है।
6. झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई किस तिथि के लिए निर्धारित की थी?
(A) 11 मई 2026
(B) 11 जून 2026
(C) 11 जुलाई 2026
(D) 11 अगस्त 2026
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) 11 जून 2026
13 अप्रैल के आदेश में अगली सुनवाई 11 जून 2026 को दोपहर 2:15 बजे के लिए निर्धारित थी।