सिदो–कान्हू जयंती 2026: संथाल हूल 1855, भोगनाडीह, चाँद–भैरव और फूलो–झानो का इतिहास

Posted on: 11 April 2026 | Category: Miscellaneous

11 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो–कान्हू उद्यान में संथाल हूल के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सिदो और कान्हू मुर्मू ने 30 जून 1855 को साहिबगंज जिले के भोगनाडीह से ब्रिटिश शासन, महाजनी शोषण और जमींदारी अत्याचार के विरुद्ध संथाल हूल का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में चाँद–भैरव तथा फूलो–झानो की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

सिदो–कान्हू जयंती 2026: संथाल हूल और स्वतंत्रता संग्राम

11 अप्रैल 2026 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन ने रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो–कान्हू उद्यान पहुँचकर वीर शहीद सिदो और कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

यह कार्यक्रम संथाल हूल के महानायकों की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था।

सिदो–कान्हू भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक जनजातीय विद्रोहों के महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ताओं में शामिल हैं।

2026 के आयोजन के प्रमुख तथ्य

  • कार्यक्रम: सिदो–कान्हू जयंती समारोह
  • तिथि: 11 अप्रैल 2026
  • स्थान: सिदो–कान्हू उद्यान, मोरहाबादी, रांची
  • मुख्यमंत्री: हेमंत सोरेन
  • अन्य प्रमुख उपस्थिति: विधायक कल्पना सोरेन
  • ऐतिहासिक विषय: संथाल हूल, 1855
महत्वपूर्ण तिथियाँ
  • 30 जून 1855 — भोगनाडीह में संथाल हूल की घोषणा।
  • 7 जुलाई 1855 — पंचकटिया क्षेत्र में औपनिवेशिक पुलिस से प्रमुख संघर्ष।
  • 1855–56 — संथाल हूल का प्रमुख संघर्षकाल।
  • 11 अप्रैल 2026 — रांची में सिदो–कान्हू जयंती समारोह।

सिदो और कान्हू कौन थे?

सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू दो भाई थे, जिन्होंने संथाल समुदाय को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध संगठित किया।

उनका संबंध वर्तमान झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गाँव से था।

संथाल हूल क्या है?

संथाल हूल 1855–56 का महत्वपूर्ण जनजातीय विद्रोह था।

संथाली संदर्भ में 'हूल' का अर्थ विद्रोह अथवा व्यापक प्रतिरोध से संबंधित है।

इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन, शोषणकारी महाजनी व्यवस्था तथा अन्यायपूर्ण राजस्व प्रणाली का विरोध करना था।

संथाल हूल के प्रमुख कारण

  • महाजनों द्वारा अत्यधिक ब्याज वसूलना।
  • जमीन पर अधिकारों का हनन।
  • ब्रिटिश राजस्व व्यवस्था का शोषण।
  • स्थानीय पुलिस एवं प्रशासनिक अत्याचार।
  • कर्ज के कारण बंधुआ श्रम जैसी परिस्थितियाँ।
  • जनजातीय समुदायों की स्वशासन की आकांक्षा।

30 जून 1855: भोगनाडीह की ऐतिहासिक सभा

30 जून 1855 को वर्तमान साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गाँव में लगभग 10,000 संथाल स्त्री-पुरुष एकत्रित हुए।

इस सभा में सिदो और कान्हू के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित संघर्ष की घोषणा की गई।

इसी घटना की स्मृति में 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है।

संथाल हूल के प्रमुख नेतृत्वकर्ता

नाम भूमिका
सिदो मुर्मू संथाल हूल के प्रमुख नेता
कान्हू मुर्मू संथाल हूल के प्रमुख नेता
चाँद मुर्मू विद्रोह के प्रमुख सहयोगी नेता
भैरव मुर्मू विद्रोह के प्रमुख सहयोगी नेता
फूलो मुर्मू विद्रोह में महिला नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका
झानो मुर्मू विद्रोह में महिला नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका

दामिन-इ-कोह क्या था?

दामिन-इ-कोह (Damin-i-Koh) राजमहल पहाड़ियों से संबंधित एक ऐतिहासिक क्षेत्र था।

ब्रिटिश शासन के दौरान इस क्षेत्र में संथाल समुदायों को बसने और खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

बाद में राजस्व, भूमि और महाजनी शोषण के कारण व्यापक असंतोष उत्पन्न हुआ।

पंचकटिया का संघर्ष

7 जुलाई 1855 को पंचकटिया क्षेत्र में संथाल विद्रोहियों और औपनिवेशिक पुलिस के बीच महत्वपूर्ण संघर्ष हुआ।

यह घटना संथाल हूल के सशस्त्र संघर्ष के प्रसार का महत्वपूर्ण चरण थी।

संथाल हूल के प्रशासनिक प्रभाव

विद्रोह के बाद ब्रिटिश प्रशासन ने क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन किए।

दिसंबर 1855 के Act XXXVII of 1855 से संथाल परगना क्षेत्र के पृथक प्रशासनिक प्रबंधन की दिशा में व्यवस्था बनाई गई।

भोगनाडीह से संबंधित महत्वपूर्ण GK

  • गाँव — भोगनाडीह।
  • प्रखंड — बरहेट।
  • जिला — साहिबगंज।
  • प्रमंडल — संथाल परगना।
  • ऐतिहासिक महत्व — संथाल हूल का प्रमुख आरंभिक केंद्र।
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सावधानी: 11 अप्रैल 2026 जयंती समारोह की तिथि है। सिदो और कान्हू के सटीक जन्म-वर्षों के संबंध में अलग-अलग विवरण मिलते हैं। इसलिए बिना पुष्ट प्रमाण के किसी निश्चित जन्म-वर्ष या जयंती क्रमांक को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

JSSC/JPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

  • संथाल हूल — 1855–56।
  • हूल दिवस — 30 जून।
  • आरंभिक सभा — भोगनाडीह।
  • जिला — साहिबगंज।
  • मुख्य नेता — सिदो और कान्हू।
  • अन्य प्रमुख नेता — चाँद और भैरव।
  • महिला नेतृत्व — फूलो और झानो।
  • प्रमुख संघर्ष — 7 जुलाई 1855, पंचकटिया।
  • ऐतिहासिक क्षेत्र — दामिन-इ-कोह।
  • 2026 का समारोह — 11 अप्रैल, मोरहाबादी, रांची।

महत्वपूर्ण MCQs

1. 11 अप्रैल 2026 को सिदो–कान्हू जयंती पर मुख्यमंत्री ने रांची में कहाँ श्रद्धांजलि दी?

(A) बिरसा स्मृति पार्क
(B) सिदो–कान्हू उद्यान, मोरहाबादी
(C) नेमरा गाँव
(D) टैगोर हिल

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) सिदो–कान्हू उद्यान, मोरहाबादी

मुख्यमंत्री ने रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो–कान्हू उद्यान में प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।


2. संथाल हूल का आरंभ किस वर्ष हुआ?

(A) 1831
(B) 1855
(C) 1857
(D) 1899

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) 1855

30 जून 1855 को भोगनाडीह की सभा से संथाल हूल की घोषणा हुई।


3. संथाल हूल का प्रसिद्ध आरंभिक केंद्र कौन-सा गाँव है?

(A) उलीहातू
(B) सिलागाईं
(C) भोगनाडीह
(D) नेमरा

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) भोगनाडीह

भोगनाडीह वर्तमान साहिबगंज जिले में स्थित है।


4. संथाल हूल में सिदो–कान्हू के साथ किन दो भाइयों का प्रमुख योगदान था?

(A) नीलांबर–पीतांबर
(B) चाँद–भैरव
(C) गणपत राय–विश्वनाथ शाहदेव
(D) बुधु भगत–तेलंगा खड़िया

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) चाँद–भैरव

चाँद और भैरव मुर्मू संथाल हूल के महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ताओं में शामिल थे।


5. संथाल हूल में महिला नेतृत्व से संबंधित नाम कौन-से हैं?

(A) फूलो–झानो
(B) रानी लक्ष्मीबाई–बेगम हजरत महल
(C) सावित्रीबाई–फातिमा
(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) फूलो–झानो

फूलो और झानो मुर्मू संथाल हूल की महत्वपूर्ण महिला सेनानियों में शामिल थीं।


6. हूल दिवस कब मनाया जाता है?

(A) 11 अप्रैल
(B) 30 जून
(C) 15 नवंबर
(D) 28 मार्च

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) 30 जून

30 जून 1855 को भोगनाडीह में संथाल हूल की घोषणा की गई थी।


7. दामिन-इ-कोह ऐतिहासिक रूप से किस क्षेत्र से संबंधित है?

(A) राजमहल पहाड़ियाँ
(B) छोटानागपुर का पठारी दक्षिणी भाग
(C) गंगा का पश्चिमी डेल्टा
(D) सोन घाटी का मध्य भाग

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) राजमहल पहाड़ियाँ

दामिन-इ-कोह राजमहल पहाड़ियों के आसपास का ऐतिहासिक क्षेत्र था।

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