झारखंड हाईकोर्ट का बर्न यूनिट संबंधी महत्वपूर्ण आदेश 2026
1 अप्रैल 2026 को झारखंड उच्च न्यायालय ने
राज्य की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से संबंधित
एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया।
न्यायालय ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि
राज्य के सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में
120 दिनों के भीतर पूर्णतः कार्यशील बर्न यूनिट
सुनिश्चित की जाएँ।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल भवन या वार्ड
उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। बर्न यूनिट में
प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्स, उपकरण, दवाएँ
और संक्रमण नियंत्रण की आवश्यक सुविधाएँ
होना भी जरूरी है।
मामले के प्रमुख तथ्य
- न्यायालय: झारखंड उच्च न्यायालय, रांची
- निर्णय की तिथि: 1 अप्रैल 2026
- मामला: Onkar Vishwakarma बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य
- वाद संख्या: W.P. (PIL) No. 920 of 2021
- न्यूट्रल सिटेशन: 2026:JHHC:9192-DB
- मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति एम. एस. सोनक
- अन्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति राजेश शंकर
- बर्न यूनिट कार्यशील बनाने की अवधि: 120 दिन
- कर्मचारियों के प्रशिक्षण की अवधि: 90 दिन
- निगरानी समिति के गठन की अवधि: चार सप्ताह, यदि पहले से गठित न हो
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- 2021 — हजारीबाग की केरोसिन आग की घटनाओं के बाद जनहित याचिका।
- 22 जुलाई 2025 — न्यायालय ने राज्य में बर्न उपचार सुविधाओं का व्यापक मुद्दा उठाया।
- 26 मार्च 2026 — मामले में निर्णय सुरक्षित रखा गया।
- 1 अप्रैल 2026 — हाईकोर्ट ने निर्णय सुनाया।
- 120 दिन — बर्न यूनिट को कार्यशील बनाने की निर्देशित अवधि।
- 90 दिन — डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण की अवधि।
- चार सप्ताह — आवश्यक होने पर निगरानी समिति के गठन की अवधि।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला वर्ष 2021 में हजारीबाग जिले में
केरोसिन से हुई आग की घटनाओं से संबंधित था।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से
आपूर्ति किए गए केरोसिन की गुणवत्ता
सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं थी।
इन घटनाओं में कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे
और कुछ लोगों की मृत्यु भी हुई थी।
याचिका में पीड़ितों के समुचित उपचार,
विशेष बर्न यूनिट की उपलब्धता
और मुआवजे से संबंधित माँगें उठाई गई थीं।
बर्न यूनिट की आवश्यकता क्यों?
गंभीर रूप से झुलसे हुए रोगियों के उपचार के लिए
विशेष चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
बर्न यूनिट में सामान्यतः निम्नलिखित
सुविधाओं का विशेष महत्व होता है:
- प्रशिक्षित चिकित्सक और नर्सिंग कर्मचारी।
- संक्रमण नियंत्रण की विशेष व्यवस्था।
- आवश्यक चिकित्सा उपकरण।
- उपयुक्त दवाएँ और अन्य चिकित्सा सामग्री।
- विशेष उपचार एवं आपातकालीन सेवाएँ।
- रोगियों की निरंतर निगरानी।
न्यायालय ने क्या पाया?
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा
दिए गए विवरणों और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
(CAG) की रिपोर्ट का परीक्षण किया गया।
न्यायालय ने पाया कि कई स्थानों पर
बर्न यूनिट से संबंधित आधारभूत संरचना
उपलब्ध होने के बावजूद आवश्यक उपकरणों
और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी थी।
न्यायालय ने कहा कि केवल कागजों पर
बर्न यूनिट उपलब्ध बताना पर्याप्त नहीं है।
स्वास्थ्य सेवाएँ वास्तविक रूप से
कार्यशील होनी चाहिए।
हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश
1. सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बर्न यूनिट
राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि
निर्णय की तिथि से 120 दिनों के भीतर
सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों
में विशेष बर्न यूनिट कार्यशील हों।
2. प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मचारी
बर्न यूनिट में डॉक्टरों, नर्सों और
पैरामेडिकल कर्मचारियों की
पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
3. 90 दिनों में प्रशिक्षण
बर्न उपचार से संबंधित चिकित्सकों
एवं स्वास्थ्यकर्मियों के लिए
90 दिनों के भीतर प्रशिक्षण
और क्षमता निर्माण की व्यवस्था की जाए।
4. दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता
सभी बर्न यूनिट में आवश्यक दवाएँ,
चिकित्सा उपकरण तथा उपचार सामग्री
निरंतर उपलब्ध कराई जाए।
5. संक्रमण नियंत्रण
बर्न रोगियों का उपचार उपयुक्त
अलगाव और संक्रमण नियंत्रण सुविधाओं
वाली विशेष बर्न यूनिट में किया जाए।
दस्तावेजों में दर्ज अपरिहार्य परिस्थितियों
को छोड़कर सामान्य वार्ड में बर्न रोगियों
के उपचार से बचने का निर्देश दिया गया।
6. 24 घंटे चिकित्सा सुविधा
बर्न यूनिट में चौबीसों घंटे
आवश्यक चिकित्सा सेवाएँ
उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
7. राज्य स्तरीय निगरानी समिति
न्यायालय ने NPPMBI दिशानिर्देशों के अनुसार
राज्य स्तरीय निगरानी समिति को
कार्यशील बनाने का निर्देश दिया।
यदि समिति पहले से गठित नहीं है,
तो उसे चार सप्ताह के भीतर गठित किया जाए।
समिति के प्रमुख के रूप में
प्रधान सचिव, स्वास्थ्य को
जिम्मेदारी दी गई।
समिति कम-से-कम प्रत्येक तीन महीने में
बैठक करके बर्न यूनिट की स्थिति की समीक्षा करेगी।
नोडल अधिकारी
Director-in-Chief, Health Services, Jharkhand
को निर्णय के क्रियान्वयन के समन्वय और
दैनिक निगरानी के लिए नोडल प्राधिकारी बनाया गया।
पीड़ितों के मुआवजे के संबंध में निर्देश
न्यायालय ने इस जनहित याचिका में
पीड़ितों के लिए माँगी गई
विशिष्ट मुआवजा राशि सीधे प्रदान नहीं की।
इसके बजाय पीड़ितों और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों
को लागू पीड़ित मुआवजा योजना के अंतर्गत
आवेदन करने का विकल्प बताया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,
हजारीबाग को पात्र पीड़ितों की सहायता
से संबंधित निर्देश दिए गए।
NPPMBI क्या है?
NPPMBI का पूर्ण रूप है:
National Programme for Prevention
and Management of Burn Injuries
यह बर्न इंजरी की रोकथाम,
विशेष उपचार तथा संबंधित स्वास्थ्य
अवसंरचना के विकास से जुड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
स्वास्थ्य के अधिकार का संवैधानिक आधार
भारतीय संविधान का
अनुच्छेद 21
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
के संरक्षण से संबंधित है।
न्यायिक व्याख्या के माध्यम से
गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार के अंतर्गत
स्वास्थ्य और आवश्यक चिकित्सा सहायता
को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
अनुच्छेद 47
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 47
राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है।
यह पोषण स्तर, जीवन स्तर और
सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के
राज्य के दायित्व से संबंधित है।
PIL क्या है?
PIL का पूर्ण रूप
Public Interest Litigation
अर्थात जनहित याचिका है।
यह व्यापक सार्वजनिक हित या
मौलिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को
न्यायालय के समक्ष उठाने का माध्यम है।
महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेद
| अनुच्छेद |
संबंधित विषय |
| 21 |
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण |
| 47 |
पोषण स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार |
| 226 |
उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति |
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण:
1 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने
बर्न यूनिट कार्यशील बनाने के लिए
120 दिनों की समयसीमा दी थी।
इसका अर्थ यह नहीं है कि उसी दिन
सभी अस्पतालों में बर्न यूनिट
पूरी तरह कार्यशील हो गई थीं।
JSSC/JPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
- निर्णय — 1 अप्रैल 2026
- वाद — W.P. (PIL) No. 920 of 2021
- मुख्य न्यायाधीश — न्यायमूर्ति एम. एस. सोनक
- अन्य न्यायाधीश — न्यायमूर्ति राजेश शंकर
- बर्न यूनिट कार्यशील बनाने की अवधि — 120 दिन
- प्रशिक्षण — 90 दिन
- निगरानी समिति का गठन — आवश्यक होने पर चार सप्ताह
- स्वास्थ्य के अधिकार का आधार — अनुच्छेद 21
- सार्वजनिक स्वास्थ्य — अनुच्छेद 47
- उच्च न्यायालय की रिट शक्ति — अनुच्छेद 226
- NPPMBI — National Programme for Prevention and Management of Burn Injuries
महत्वपूर्ण MCQs
1. झारखंड हाईकोर्ट ने बर्न यूनिट संबंधी महत्वपूर्ण आदेश कब दिया?
(A) 1 मार्च 2026
(B) 1 अप्रैल 2026
(C) 9 अप्रैल 2026
(D) 15 अप्रैल 2026
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) 1 अप्रैल 2026
हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को Onkar Vishwakarma मामले में निर्णय दिया।
2. हाईकोर्ट ने सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यशील बर्न यूनिट सुनिश्चित करने के लिए कितने दिन दिए?
(A) 30 दिन
(B) 60 दिन
(C) 90 दिन
(D) 120 दिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (D) 120 दिन
न्यायालय ने 120 दिनों के भीतर बर्न यूनिट कार्यशील बनाने का निर्देश दिया।
3. चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिए कितनी अवधि निर्धारित की गई?
(A) 30 दिन
(B) 60 दिन
(C) 90 दिन
(D) 120 दिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) 90 दिन
न्यायालय ने बर्न उपचार में लगे चिकित्सकों एवं अन्य कर्मचारियों का प्रशिक्षण 90 दिनों में कराने का निर्देश दिया।
4. स्वास्थ्य के अधिकार को प्रमुख रूप से संविधान के किस अनुच्छेद से जोड़ा गया है?
(A) अनुच्छेद 14
(B) अनुच्छेद 19
(C) अनुच्छेद 21
(D) अनुच्छेद 32
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) अनुच्छेद 21
गरिमापूर्ण जीवन और आवश्यक चिकित्सा सुविधा के अधिकार को अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या से जोड़ा गया है।
5. NPPMBI का संबंध किससे है?
(A) बर्न इंजरी की रोकथाम और उपचार
(B) राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण
(C) प्राथमिक विद्यालय निर्माण
(D) सड़क सुरक्षा परियोजना
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) बर्न इंजरी की रोकथाम और उपचार
NPPMBI बर्न इंजरी की रोकथाम और प्रबंधन से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
6. सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार से संविधान का कौन-सा नीति-निर्देशक तत्व संबंधित है?
(A) अनुच्छेद 40
(B) अनुच्छेद 44
(C) अनुच्छेद 47
(D) अनुच्छेद 50
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) अनुच्छेद 47
अनुच्छेद 47 पोषण स्तर, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के दायित्व से संबंधित है।
7. उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति संविधान के किस अनुच्छेद से संबंधित है?
(A) अनुच्छेद 72
(B) अनुच्छेद 161
(C) अनुच्छेद 226
(D) अनुच्छेद 280
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) अनुच्छेद 226
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को निर्धारित उद्देश्यों के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करता है।