नीलांबर–पीतांबर शहादत दिवस 2026
28 मार्च 2026 को झारखंड
में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम
के महत्वपूर्ण सेनानियों
नीलांबर और पीतांबर
का शहादत दिवस मनाया गया।
पलामू क्षेत्र में दोनों
स्वतंत्रता सेनानियों की
स्मृति में श्रद्धांजलि
कार्यक्रम आयोजित किए गए।
नीलांबर–पीतांबर ने
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध
1857 के विद्रोह में
महत्वपूर्ण नेतृत्व
प्रदान किया था।
प्रमुख तथ्य
- अवसर: नीलांबर–पीतांबर शहादत दिवस
- तिथि: 28 मार्च 2026
- ऐतिहासिक शहादत की तिथि: 28 मार्च 1859
- शहादत स्थल: लेस्लीगंज
- वर्तमान प्रशासनिक नाम: नीलांबर–पीतांबरपुर, पलामू
- संबंधित विद्रोह: 1857 का पलामू विद्रोह
- जनजातीय संबंध: खरवार जनजाति का भोगता समुदाय
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- 1857 — पलामू क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह।
- 21 अक्टूबर 1857 — नीलांबर–पीतांबर के नेतृत्व में लगभग 500 विद्रोहियों की कार्रवाई।
- 28 मार्च 1859 — नीलांबर–पीतांबर को लेस्लीगंज में फाँसी।
- 28 मार्च 2026 — शहादत दिवस का आयोजन।
नीलांबर–पीतांबर कौन थे?
नीलांबर और पीतांबर
दो भाई थे, जिन्होंने
1857 के विद्रोह में
पलामू क्षेत्र के
स्थानीय समुदायों को
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध
संगठित किया।
लातेहार जिला प्रशासन
के ऐतिहासिक विवरण के
अनुसार उनका संबंध
खरवार जनजाति के
भोगता समुदाय
से था।
पलामू में 1857 का विद्रोह
1857 के स्वतंत्रता
संग्राम का प्रभाव
छोटानागपुर क्षेत्र
पर भी पड़ा।
पलामू क्षेत्र में
जनजातीय समुदायों,
स्थानीय जागीरदारों
और अन्य समूहों ने
ब्रिटिश शासन के
विरुद्ध संघर्ष किया।
विद्रोह के प्रमुख कारण
- औपनिवेशिक शासन के प्रति असंतोष।
- स्थानीय भूमि एवं प्रशासनिक व्यवस्था में हस्तक्षेप।
- ब्रिटिश समर्थक स्थानीय शक्तियों से संघर्ष।
- आर्थिक एवं सामाजिक शोषण।
- स्थानीय स्वतंत्रता की भावना।
21 अक्टूबर 1857 की घटना
लातेहार जिला प्रशासन
के ऐतिहासिक विवरण
के अनुसार 21 अक्टूबर
1857 को नीलांबर और
पीतांबर के नेतृत्व में
लगभग 500 लोगों
का दल संगठित हुआ।
इस दल ने ब्रिटिश
समर्थक रघुबर दयाल
के विरुद्ध चैनपुर
क्षेत्र में कार्रवाई की।
इसके बाद विद्रोहियों
ने लेस्लीगंज क्षेत्र
में भी कार्रवाई की।
चेरो समुदाय की भागीदारी
इस संघर्ष में
विभिन्न स्थानीय
समुदायों और
चेरो जागीरदारों
ने भाग लिया।
देवी बख्श राय का नाम
भी इस विद्रोह से
संबंधित ऐतिहासिक
विवरणों में मिलता है।
पलामू किला और संघर्ष
1857–58 के दौरान
पलामू किला और
उसके आसपास का
क्षेत्र ब्रिटिश
सेना तथा विद्रोहियों
के बीच संघर्ष
का महत्वपूर्ण केंद्र रहा।
जनवरी 1858 में
ब्रिटिश अधिकारी
डाल्टन के नेतृत्व
में सैन्य कार्रवाई
की गई।
नीलांबर–पीतांबर का संघर्ष
ब्रिटिश सेना के
दमन के बावजूद
स्थानीय विद्रोहियों
ने संघर्ष जारी रखा।
जंगलों और पहाड़ी
क्षेत्रों की भौगोलिक
परिस्थितियाँ इस
संघर्ष में महत्वपूर्ण थीं।
नीलांबर–पीतांबर की शहादत
आखिरकार ब्रिटिश
सेना ने दोनों भाइयों
को गिरफ्तार कर लिया।
ऐतिहासिक विवरणों
के अनुसार
28 मार्च 1859
को उन्हें लेस्लीगंज
में फाँसी दी गई।
लेस्लीगंज और नीलांबर–पीतांबरपुर
लेस्लीगंज वर्तमान
झारखंड के पलामू
जिले में स्थित है।
इस क्षेत्र के प्रखंड
का प्रशासनिक नाम
नीलांबर–पीतांबरपुर
है।
यह नाम दोनों
स्वतंत्रता सेनानियों
की स्मृति से जुड़ा है।
खरवार जनजाति से संबंधित तथ्य
खरवार झारखंड के
प्रमुख जनजातीय
समुदायों में
शामिल है।
नीलांबर–पीतांबर का
संबंध इसी जनजातीय
समुदाय की भोगता
परंपरा से बताया
जाता है।
पलामू क्षेत्र से संबंधित Static GK
- पलामू — झारखंड का एक प्रमुख ऐतिहासिक क्षेत्र।
- पलामू किला — 1857 के संघर्ष से संबंधित ऐतिहासिक स्थल।
- लेस्लीगंज — नीलांबर–पीतांबर की शहादत से संबंधित स्थान।
- वर्तमान प्रखंड — नीलांबर–पीतांबरपुर।
- संबंधित जनजाति — खरवार।
ऐतिहासिक सावधानी:
कुछ समकालीन समाचारों
में शहादत दिवस का
क्रमांक अलग-अलग दिया
गया है। यहाँ 28 मार्च
1859 की ऐतिहासिक
तिथि और 2026 में
आयोजित शहादत दिवस
को प्राथमिकता दी गई है।
JSSC/JPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
- नीलांबर–पीतांबर — 1857 के स्वतंत्रता सेनानी।
- संबंधित क्षेत्र — पलामू।
- जनजाति — खरवार।
- समुदाय — भोगता।
- विद्रोह की प्रमुख घटना — 21 अक्टूबर 1857।
- विद्रोहियों की संख्या — लगभग 500।
- शहादत — 28 मार्च 1859।
- शहादत स्थल — लेस्लीगंज।
- वर्तमान प्रखंड — नीलांबर–पीतांबरपुर।
महत्वपूर्ण MCQs
1. नीलांबर–पीतांबर का संबंध किस प्रमुख विद्रोह से था?
(A) 1857 का पलामू विद्रोह
(B) संथाल हूल 1855
(C) भारत छोड़ो आंदोलन 1942
(D) चंपारण सत्याग्रह
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) 1857 का पलामू विद्रोह
नीलांबर–पीतांबर ने पलामू क्षेत्र में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया।
2. नीलांबर–पीतांबर किस जनजाति से संबंधित थे?
(A) संथाल
(B) खरवार
(C) मुंडा
(D) हो
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) खरवार
लातेहार जिला प्रशासन के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार उनका संबंध खरवार जनजाति के भोगता समुदाय से था।
3. नीलांबर–पीतांबर को कब फाँसी दी गई थी?
(A) 28 मार्च 1857
(B) 28 मार्च 1858
(C) 28 मार्च 1859
(D) 28 मार्च 1860
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) 28 मार्च 1859
दोनों स्वतंत्रता सेनानियों को 28 मार्च 1859 को लेस्लीगंज में फाँसी दी गई थी।
4. नीलांबर–पीतांबर की शहादत किस स्थान से संबंधित है?
(A) उलीहातू
(B) लेस्लीगंज
(C) भोगनाडीह
(D) सिलागाईं
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) लेस्लीगंज
लेस्लीगंज पलामू जिले में स्थित है और इसे नीलांबर–पीतांबर की शहादत से जोड़ा जाता है।
5. 21 अक्टूबर 1857 को नीलांबर–पीतांबर के नेतृत्व में लगभग कितने लोगों का दल संगठित हुआ था?
(A) 100
(B) 250
(C) 500
(D) 1000
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) 500
लातेहार जिला प्रशासन के अनुसार लगभग 500 लोगों ने उनके नेतृत्व में विद्रोही कार्रवाई की।
6. नीलांबर–पीतांबर का संबंध किस वर्तमान झारखंडी ऐतिहासिक क्षेत्र से है?
(A) कोल्हान
(B) पलामू
(C) राजमहल
(D) सिंहभूम तटीय क्षेत्र
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) पलामू
दोनों भाइयों ने पलामू क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
7. लेस्लीगंज से संबंधित प्रखंड का वर्तमान प्रशासनिक नाम क्या है?
(A) बिरसा नगर
(B) नीलांबर–पीतांबरपुर
(C) सिदो–कान्हू नगर
(D) जयपाल सिंह नगर
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) नीलांबर–पीतांबरपुर
पलामू जिले के लेस्लीगंज से संबंधित प्रखंड का प्रशासनिक नाम नीलांबर–पीतांबरपुर है।
8. 1857 के पलामू विद्रोह में नीलांबर–पीतांबर के साथ किस स्थानीय समुदाय के जागीरदारों की भागीदारी का उल्लेख मिलता है?
(A) चेरो
(B) गारो
(C) टोडा
(D) लेपचा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) चेरो
ऐतिहासिक विवरणों में नीलांबर–पीतांबर के साथ चेरो जागीरदारों की भागीदारी का उल्लेख है।