झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक 2026: 23 आजीवन कारावास प्राप्त बंदियों की रिहाई पर सहमति

Posted on: 02 March 2026 | Category: Miscellaneous

2 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न अभिलेखों और अनुशंसाओं की समीक्षा के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23 बंदियों की समयपूर्व रिहाई पर सहमति बनी। यह निर्णय कारागार प्रशासन, दंडादेश पुनरीक्षण और बंदियों के पुनर्वास से संबंधित महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटना है।

झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक

2 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद (State Sentence Review Board) की 36वीं बैठक आयोजित हुई।

बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23 बंदियों की समयपूर्व रिहाई पर सहमति बनी।

प्रमुख तथ्य

  • बैठक: राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक
  • तिथि: 2 मार्च 2026
  • स्थान: मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, कांके रोड, रांची
  • अध्यक्षता: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
  • रिहाई पर सहमति: 23 बंदी
  • सजा का प्रकार: आजीवन कारावास
  • मुख्य विषय: समयपूर्व रिहाई के प्रस्तावों का परीक्षण
महत्वपूर्ण तिथि: 2 मार्च 2026 — राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक में 23 आजीवन कारावास प्राप्त बंदियों की रिहाई पर सहमति।

बैठक में किन मामलों की समीक्षा हुई?

बैठक में नए प्रस्तावों के साथ पूर्व की बैठकों में अस्वीकृत किए गए 34 मामलों पर भी विचार किया गया।

विभिन्न प्रशासनिक एवं न्यायिक अभिलेखों के आधार पर प्रस्तावों की समीक्षा की गई।

समीक्षा में किन अभिलेखों पर विचार किया गया?

  • संबंधित न्यायालयों की रिपोर्ट।
  • जिला पुलिस अधीक्षकों की रिपोर्ट।
  • कारा अधीक्षकों की रिपोर्ट।
  • परिवीक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट।
  • अपराध की प्रकृति और संबंधित परिस्थितियाँ।

राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद क्या है?

राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद सजा काट रहे पात्र बंदियों की समयपूर्व रिहाई से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा करने वाली राज्य स्तरीय व्यवस्था है।

इसमें निर्धारित नीति, लागू कानून तथा प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर विचार किया जाता है।

समयपूर्व रिहाई क्या है?

समयपूर्व रिहाई का अर्थ यह है कि किसी दोषसिद्ध व्यक्ति की शेष सजा के संबंध में लागू कानून और सरकारी नीति के अनुसार रियायत या परिहार पर विचार किया जाए।

इसे न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के समान नहीं समझना चाहिए।

क्या आजीवन कारावास का अर्थ केवल 14 वर्ष है?

नहीं। आजीवन कारावास का सामान्य कानूनी अर्थ व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास हो सकता है।

लागू कानून और न्यायिक निर्णयों के अनुसार कुछ मामलों में न्यूनतम अवधि पूरी होने के बाद समयपूर्व रिहाई पर विचार किया जा सकता है।

केवल 14 वर्ष की सजा पूरी कर लेने से प्रत्येक बंदी को स्वतः रिहाई का अधिकार प्राप्त नहीं होता।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 161

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 161 राज्यपाल की क्षमादान एवं सजा संबंधी अन्य राहत प्रदान करने की शक्ति से संबंधित है।

राज्य की कार्यपालिका शक्ति से संबंधित विधि-विषयों में यह प्रावधान प्रासंगिक होता है।

अनुच्छेद 72 और अनुच्छेद 161 में अंतर

अनुच्छेद 72 अनुच्छेद 161
राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति राज्यपाल की क्षमादान शक्ति
संविधान में निर्दिष्ट केंद्रीय विषयों और अन्य मामलों से संबंधित राज्य की कार्यपालिका शक्ति से संबंधित विधि-विषयों के अपराधों से संबंधित
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: 2 मार्च 2026 की बैठक में 23 बंदियों की रिहाई पर सहमति बनी थी। इसका अर्थ यह नहीं कि सभी बंदी उसी दिन जेल से रिहा हो गए। वास्तविक रिहाई लागू प्रक्रिया और आवश्यक आदेशों के अनुसार होती है।
कानूनी सावधानी: राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की अनुशंसा, राज्यपाल की अनुच्छेद 161 के अंतर्गत क्षमादान शक्ति और संबंधित आपराधिक प्रक्रिया कानूनों के अंतर्गत सजा परिहार एक समान कानूनी प्रक्रिया नहीं हैं।

JSSC/JPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

  • पर्षद की बैठक — 36वीं
  • तिथि — 2 मार्च 2026
  • अध्यक्षता — मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
  • रिहाई पर सहमति — 23 बंदी
  • संबंधित विषय — कारागार प्रशासन
  • राज्यपाल की क्षमादान शक्ति — अनुच्छेद 161
  • राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति — अनुच्छेद 72

महत्वपूर्ण MCQs

1. झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक कब हुई?

(A) 1 मार्च 2026
(B) 2 मार्च 2026
(C) 5 मार्च 2026
(D) 10 मार्च 2026

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) 2 मार्च 2026

2 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पर्षद की 36वीं बैठक हुई।


2. बैठक में कितने बंदियों की रिहाई पर सहमति बनी?

(A) 13
(B) 23
(C) 33
(D) 43

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) 23

बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23 बंदियों की रिहाई पर सहमति बनी।


3. झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक की अध्यक्षता किसने की?

(A) राज्यपाल
(B) मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
(C) विधानसभा अध्यक्ष
(D) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री ने बैठक की अध्यक्षता की और संबंधित मामलों की समीक्षा की।


4. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति से संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संबंधित है?

(A) अनुच्छेद 72
(B) अनुच्छेद 161
(C) अनुच्छेद 226
(D) अनुच्छेद 280

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) अनुच्छेद 161

अनुच्छेद 161 राज्यपाल की क्षमादान एवं सजा संबंधी राहत की संवैधानिक शक्ति से संबंधित है।


5. समयपूर्व रिहाई संबंधी कौन-सा कथन सही है?

(A) 14 वर्ष पूरे होने पर सभी बंदी स्वतः रिहा हो जाते हैं।
(B) समयपूर्व रिहाई और न्यायालय से दोषमुक्ति एक ही बात है।
(C) समयपूर्व रिहाई लागू कानून और नीति के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया से होती है।
(D) समयपूर्व रिहाई में किसी समीक्षा की आवश्यकता नहीं होती।

उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C)

समयपूर्व रिहाई के लिए संबंधित कानून, नीति तथा आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

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