वीर बुधु भगत की 234वीं जयंती 2026
17 फरवरी 2026 को झारखंड के
रांची जिले में स्थित सिलागाईं गाँव में
वीर बुधु भगत की 234वीं जयंती
मनाई गई।
इस अवसर पर जयंती समारोह सह
विकास मेले का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं
सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की
और कल्याण मंत्री चमरा लिंडा शामिल हुए।
2026 के कार्यक्रम के प्रमुख तथ्य
- अवसर: वीर बुधु भगत की 234वीं जयंती
- तिथि: 17 फरवरी 2026
- स्थान: सिलागाईं, चान्हो प्रखंड
- जिला: रांची
- मुख्य अतिथि: शिल्पी नेहा तिर्की एवं चमरा लिंडा
- आयोजन: जयंती समारोह सह विकास मेला
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- 17 फरवरी 1792 — वीर बुधु भगत की प्रचलित जन्मतिथि।
- 1831–32 — कोल विद्रोह का प्रमुख कालखंड।
- 13 फरवरी 1832 — वीर बुधु भगत का बलिदान।
- 17 फरवरी 2026 — 234वीं जयंती का आयोजन।
वीर बुधु भगत का परिचय
वीर बुधु भगत झारखंड के प्रमुख
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों में
शामिल थे।
उनकी प्रचलित जन्मतिथि
17 फरवरी 1792 है तथा उनका
जन्मस्थान रांची जिले का
सिलागाईं गाँव माना जाता है।
वे उरांव जनजाति
से संबंधित थे।
उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
की राजस्व नीतियों और स्थानीय
जनता के शोषण के विरुद्ध संघर्ष किया।
कोल विद्रोह 1831–32
कोल विद्रोह छोटानागपुर क्षेत्र में
ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था
के विरुद्ध हुआ एक प्रमुख
जनजातीय विद्रोह था।
कोल विद्रोह के प्रमुख कारण
- ब्रिटिश राजस्व व्यवस्था का विस्तार।
- पारंपरिक भूमि अधिकारों पर हस्तक्षेप।
- जमींदारों एवं साहूकारों द्वारा शोषण।
- स्थानीय स्वशासन व्यवस्था में परिवर्तन।
- आदिवासी समुदायों की सामाजिक एवं आर्थिक असंतुष्टि।
लरका आंदोलन
वीर बुधु भगत का नाम
लरका आंदोलन
से जुड़ा हुआ है।
इस आंदोलन में ब्रिटिश शासन
और स्थानीय शोषणकारी व्यवस्था
के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध किया गया।
बुधु भगत ने स्थानीय लोगों
को संगठित करके अंग्रेजी शासन
के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया।
गुरिल्ला युद्ध प्रणाली
वीर बुधु भगत जंगलों और
पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक
परिस्थितियों का उपयोग करके
संघर्ष करने के लिए जाने जाते थे।
उन्होंने स्थानीय योद्धाओं
को संगठित करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई।
वीर बुधु भगत का बलिदान
13 फरवरी 1832 को ब्रिटिश
सेना के साथ संघर्ष में
वीर बुधु भगत ने वीरगति प्राप्त की।
उनके दो पुत्रों हलधर और गिरधर
के बलिदान का भी ऐतिहासिक
विवरणों में उल्लेख मिलता है।
2026 के जयंती समारोह की गतिविधियाँ
- वीर बुधु भगत की प्रतिमा पर माल्यार्पण।
- जनजातीय इतिहास और संस्कृति पर चर्चा।
- विकास मेले का आयोजन।
- लाभार्थियों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण।
- जनजातीय इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने पर जोर।
ऐतिहासिक तथ्य संबंधी सावधानी:
2026 में मनाई गई 234वीं जयंती
की गणना वर्ष 1792 को जन्मवर्ष
मानकर की गई थी। कुछ ऐतिहासिक
प्रकाशनों में जन्मवर्ष संबंधी अंतर
मिलता है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं
के लिए आधिकारिक स्रोत के साथ
इस तथ्य का अध्ययन करना उचित है।
JSSC/JPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
- प्रचलित जन्मतिथि — 17 फरवरी 1792
- जन्मस्थान — सिलागाईं, रांची
- जनजाति — उरांव
- संबंधित आंदोलन — कोल विद्रोह एवं लरका आंदोलन
- बलिदान — 13 फरवरी 1832
- 234वीं जयंती — 17 फरवरी 2026
महत्वपूर्ण MCQs
1. प्रचलित ऐतिहासिक विवरण के अनुसार वीर बुधु भगत का जन्म कब हुआ था?
(A) 17 फरवरी 1792
(B) 17 फरवरी 1800
(C) 13 फरवरी 1832
(D) 15 नवंबर 1875
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) 17 फरवरी 1792
वीर बुधु भगत का प्रचलित जन्मवर्ष 1792 है और इसी आधार पर 2026 में उनकी 234वीं जयंती मनाई गई।
2. वीर बुधु भगत किस जनजाति से संबंधित थे?
(A) संथाल
(B) मुंडा
(C) उरांव
(D) हो
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) उरांव
वीर बुधु भगत उरांव जनजाति से संबंधित थे।
3. वीर बुधु भगत का जन्मस्थान कहाँ है?
(A) उलीहातू
(B) सिलागाईं
(C) भोगनाडीह
(D) खरसावां
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) सिलागाईं
सिलागाईं रांची जिले के चान्हो प्रखंड में स्थित है।
4. वीर बुधु भगत का संबंध किस प्रमुख विद्रोह से था?
(A) संथाल हूल
(B) कोल विद्रोह
(C) भारत छोड़ो आंदोलन
(D) स्वदेशी आंदोलन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) कोल विद्रोह
वीर बुधु भगत 1831–32 के कोल विद्रोह के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में शामिल थे।
5. वीर बुधु भगत ने कब वीरगति प्राप्त की?
(A) 13 फरवरी 1832
(B) 17 फरवरी 1792
(C) 30 जून 1855
(D) 9 जून 1900
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) 13 फरवरी 1832
वीर बुधु भगत ब्रिटिश सेना के साथ संघर्ष करते हुए 13 फरवरी 1832 को वीरगति को प्राप्त हुए।