MCQs for JSSC

महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। उत्तर, व्याख्या, विषय और परीक्षा टैग के साथ।

MCQs for JSSC

श्रेणी: | परीक्षा: JSSC

1681
Hindi Grammar • Sentence Correction
इनमें से शुद्ध वाक्य कौन-सा है? इनमें से शुद्ध वाक्य कौन-सा है?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: D Correct Answer: D
“उसने एक ही रोटी खाई” शुद्ध वाक्य है।
“उसने एक ही रोटी खाई” शुद्ध वाक्य है।
1682
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

वह नदी के पास में किसे देख रहा था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

वह नदी के पास में किसे देख रहा था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: D Correct Answer: D
गद्यांश के अनुसार, अहमद ने नदी के पास एक मुर्गी देखी थी।
गद्यांश के अनुसार, अहमद ने नदी के पास एक मुर्गी देखी थी।
1683
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद का घर कहाँ था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद का घर कहाँ था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
अहमद का घर श्रीनगर में था।
अहमद का घर श्रीनगर में था।
1684
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद के बेटे का क्या नाम था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद के बेटे का क्या नाम था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: D Correct Answer: D
गद्यांश में अहमद के पुत्र का नाम मुन्नू बताया गया है।
गद्यांश में अहमद के पुत्र का नाम मुन्नू बताया गया है।
1685
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

उसकी पत्नी क्या सिलाना चाहती थी?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

उसकी पत्नी क्या सिलाना चाहती थी?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
अहमद की पत्नी एक नया फिरन सिलवाना चाहती थी।
अहमद की पत्नी एक नया फिरन सिलवाना चाहती थी।
1686
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद मुर्गी कहाँ से लेकर आया था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद मुर्गी कहाँ से लेकर आया था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
अहमद ने मुर्गी बाजार से खरीदी थी।
अहमद ने मुर्गी बाजार से खरीदी थी।
1687
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद ने कठिन परिश्रम से कितना पैसा बचाया था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद ने कठिन परिश्रम से कितना पैसा बचाया था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
पाँच महीने के कठिन परिश्रम के बाद अहमद केवल बारह आने बचा पाया था।
पाँच महीने के कठिन परिश्रम के बाद अहमद केवल बारह आने बचा पाया था।
1688
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद घर छोड़कर कितने महीने हुआ था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद घर छोड़कर कितने महीने हुआ था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: D Correct Answer: D
अहमद को घर छोड़े पाँच महीने हो चुके थे।
अहमद को घर छोड़े पाँच महीने हो चुके थे।
1689
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद काम करने कहाँ आया था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद काम करने कहाँ आया था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: C Correct Answer: C
अहमद काम करने के लिए गुलमर्ग आया था।
अहमद काम करने के लिए गुलमर्ग आया था।
1690
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद ने कितने पैसे में मुर्गी खरीदी थी?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद ने कितने पैसे में मुर्गी खरीदी थी?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: A Correct Answer: A
गद्यांश के अनुसार, अहमद ने मुर्गी छः आने में खरीदी थी।
गद्यांश के अनुसार, अहमद ने मुर्गी छः आने में खरीदी थी।

श्रेणी अनुसार अभ्यास करें

वर्तमान परीक्षा टैग के भीतर किसी श्रेणी को चुनकर अभ्यास करें।

विषय अनुसार अभ्यास करें

किसी विषय को चुनकर उसी विषय के सभी MCQs का अभ्यास करें।

टॉपिक अनुसार अभ्यास करें

किसी एक टॉपिक पर केंद्रित अभ्यास के लिए कार्ड चुनें।

परीक्षा अनुसार अभ्यास करें

अन्य परीक्षा टैग के अनुसार प्रश्नों का अभ्यास करें।