Hindi MCQs for JSSC

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Hindi MCQs for JSSC

श्रेणी: Hindi | परीक्षा: JSSC

171
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे?
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सही उत्तर: D Correct Answer: D
लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे।
लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे।
172
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे?
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सही उत्तर: C Correct Answer: C
गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है।
गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम का पेशा क्या था?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम का पेशा क्या था?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है।
शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है।
174
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद ने मित्र की विवशता देखकर उसे क्या बनाने का सुझाव दिया?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद ने मित्र की विवशता देखकर उसे क्या बनाने का सुझाव दिया?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
गद्यांश के अनुसार, लाला सदानंद ने शबीराम को एल्बम बनाने का सुझाव दिया था।
गद्यांश के अनुसार, लाला सदानंद ने शबीराम को एल्बम बनाने का सुझाव दिया था।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद के चरित्र से असंबंधित कथन कौन-सा है?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद के चरित्र से असंबंधित कथन कौन-सा है?
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सही उत्तर: D Correct Answer: D
सदानंद का चरित्र उदार और उपकारी था, कृपण नहीं।
सदानंद का चरित्र उदार और उपकारी था, कृपण नहीं।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद ने एल्बम को किसके यहाँ से मंगवाने की बात कही?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद ने एल्बम को किसके यहाँ से मंगवाने की बात कही?
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सही उत्तर: D Correct Answer: D
लाला सदानंद ने कहा कि एल्बम कलकत्ता के किसी सेठ के यहाँ से मंगवाया गया है।
लाला सदानंद ने कहा कि एल्बम कलकत्ता के किसी सेठ के यहाँ से मंगवाया गया है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद का व्यक्तित्व कैसा था?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद का व्यक्तित्व कैसा था?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
गद्यांश में लाला सदानंद को उदार चरित्र वाला व्यक्ति बताया गया है।
गद्यांश में लाला सदानंद को उदार चरित्र वाला व्यक्ति बताया गया है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

एल्बम को वास्तव में किसने खरीदा था?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

एल्बम को वास्तव में किसने खरीदा था?
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सही उत्तर: C Correct Answer: C
गद्यांश के अनुसार, एल्बम वास्तव में लाला सदानंद ने स्वयं खरीदा था।
गद्यांश के अनुसार, एल्बम वास्तव में लाला सदानंद ने स्वयं खरीदा था।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद ने शबीराम को एल्बम के बारे में क्या कहा?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद ने शबीराम को एल्बम के बारे में क्या कहा?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
सदानंद ने सत्य छुपाकर एल्बम के विषय में झूठ कहा था।
सदानंद ने सत्य छुपाकर एल्बम के विषय में झूठ कहा था।
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Hindi Grammar • सर्वनाम
“वह अपना काम अपने आप करता है।” यह वाक्य सर्वनाम के किस भेद का उदाहरण है? “वह अपना काम अपने आप करता है।” यह वाक्य सर्वनाम के किस भेद का उदाहरण है?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
“अपने आप” स्वयं के लिए प्रयुक्त है; अतः यह निजवाचक सर्वनाम है।
“अपने आप” स्वयं के लिए प्रयुक्त है; अतः यह निजवाचक सर्वनाम है।

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