11 Books & Literature • Books on Economy ‘इंडियन बैंकिंग इन रेट्रोस्पेक्ट - 75 इयर्स ऑफ इंडिपेंडेंस’ नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं? Who authored the book “Indian Banking in Retrospect - 75 Years of Independence”? सेव करें Save सेव्ड Saved A. डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन Dr Tamilisai Soundararajan B. डॉ. आशुतोष राराविकर Dr Ashutosh Raravikar C. प्रो. जगदीश मुखी Prof. Jagadish Mukhi D. प्रफुल पटेल Praful Patel उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B ‘इंडियन बैंकिंग इन रेट्रोस्पेक्ट - 75 इयर्स ऑफ इंडिपेंडेंस’ के लेखक डॉ. आशुतोष राराविकर हैं। पुस्तक में स्वतंत्रता के बाद भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के विकास, सुधारों और प्रमुख चुनौतियों का वर्णन किया गया है। Dr Ashutosh Raravikar authored “Indian Banking in Retrospect - 75 Years of Independence”. The book examines the development, reforms and major challenges of Indian banking since Independence.
12 Books & Literature • Biographies & Memoirs निम्नलिखित में से किस पुस्तक का सह-लेखन मीना के. अय्यर ने किया है? Which of the following books was co-authored by Meena K. Iyer? सेव करें Save सेव्ड Saved A. इंटरप्रेटर ऑफ मैलडीज Interpreter of Maladies B. एन ऑटोबायोग्राफी An Autobiography C. एजुकेशन ऑफ मुस्लिम्स Education of Muslims D. आई एम नो मसीहा I Am No Messiah उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D ‘आई एम नो मसीहा’ अभिनेता सोनू सूद का संस्मरण है, जिसका सह-लेखन पत्रकार और लेखिका मीना के. अय्यर ने किया है। यह पुस्तक कोविड-19 महामारी के दौरान सोनू सूद के राहत कार्यों पर आधारित है। “I Am No Messiah” is a memoir by actor Sonu Sood, co-authored by journalist and writer Meena K. Iyer. It describes Sood’s relief work during the COVID-19 pandemic.
13 Books & Literature • Indian Languages & Scripts निम्नलिखित में से कौन-सी भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषा मानी जाती है? Which of the following is considered the oldest living Indian language? सेव करें Save सेव्ड Saved A. तेलुगु Telugu B. तमिल Tamil C. पंजाबी Punjabi D. हिंदी Hindi उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B तमिल को भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में माना जाता है। इसका साहित्यिक इतिहास दो हजार वर्षों से अधिक पुराना है और इसे भारत सरकार द्वारा शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। Tamil is regarded as one of India’s oldest living languages. Its literary tradition extends for more than two thousand years, and it is recognised as a classical language by the Government of India.
14 Books & Literature • Indian Languages & Scripts निम्नलिखित में से कौन-सी भाषा सिक्किम में सामान्यतः नहीं बोली जाती है? Which of the following languages is not commonly spoken in Sikkim? सेव करें Save सेव्ड Saved A. बोडो Bodo B. लेपचा Lepcha C. भूटिया Bhutia D. नेपाली Nepali उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: A Correct Answer: A नेपाली, भूटिया और लेपचा सिक्किम की प्रमुख भाषाएँ हैं। बोडो मुख्यतः असम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ अन्य क्षेत्रों में बोली जाती है तथा सिक्किम की प्रमुख भाषाओं में शामिल नहीं है। Nepali, Bhutia and Lepcha are major languages of Sikkim. Bodo is spoken principally in Assam and some other parts of northeastern India and is not among Sikkim’s major languages.
15 Books & Literature • Sahitya Akademi Awards निम्नलिखित में से किस वर्ष उर्दू साहित्य के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया था? In which of the following years was the Sahitya Akademi Award not conferred for Urdu literature? सेव करें Save सेव्ड Saved A. 1976 1976 B. 1982 1982 C. 1972 1972 D. 1975 1975 उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C साहित्य अकादेमी के पुरस्कार अभिलेखों के अनुसार वर्ष 1972 में उर्दू साहित्य के लिए कोई पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया था। वर्ष 1975 में कैफी आजमी, 1976 में जाँ निसार अख्तर और 1982 में ज्ञान चंद जैन को यह पुरस्कार मिला था। According to Sahitya Akademi award records, no award was conferred for Urdu literature in 1972. Kaifi Azmi received it in 1975, Jan Nisar Akhtar in 1976 and Gyan Chand Jain in 1982.
16 Books & Literature • Literary Personalities निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार किस कृति के लिए मिला था? निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार किस कृति के लिए मिला था? सेव करें Save सेव्ड Saved A. गोरा गोरा B. घरे-बाइरे घरे-बाइरे C. गीतांजलि (अंग्रेजी अनुवाद) गीतांजलि (अंग्रेजी अनुवाद) D. चित्रांगदा चित्रांगदा उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C रवीन्द्रनाथ टैगोर को 1913 में गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। Rabindranath Tagore received the Nobel Prize in Literature in 1913 for the English translation of Gitanjali.
17 Books & Literature • Literary Personalities निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान रवीन्द्रनाथ टैगोर के बांग्लादेश प्रवास से संबंधित था? निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान रवीन्द्रनाथ टैगोर के बांग्लादेश प्रवास से संबंधित था? सेव करें Save सेव्ड Saved A. शांतिनिकेतन शांतिनिकेतन B. काशी काशी C. शिलाईदह शिलाईदह D. श्रीनगर श्रीनगर उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C गद्यांश के अनुसार टैगोर ने तत्कालीन पूर्वी बंगाल में शिलाईदह सहित कई स्थानों पर समय बिताया था। According to the passage, Tagore spent time at several places in the then East Bengal, including Shilaidaha.
18 Books & Literature • Literary Personalities निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, रवीन्द्रनाथ टैगोर को कौन-सा दुर्लभ सम्मान प्राप्त था? निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, रवीन्द्रनाथ टैगोर को कौन-सा दुर्लभ सम्मान प्राप्त था? सेव करें Save सेव्ड Saved A. तीन देशों के राष्ट्रगान लिखने का तीन देशों के राष्ट्रगान लिखने का B. भारत का राष्ट्रगान लिखने का भारत का राष्ट्रगान लिखने का C. साहित्य और संगीत दोनों में नोबेल पाने का साहित्य और संगीत दोनों में नोबेल पाने का D. दो देशों के राष्ट्रगान लिखने का दो देशों के राष्ट्रगान लिखने का उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D टैगोर को भारत और बांग्लादेश - दो देशों के राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है। Tagore had the rare distinction of writing the national anthems of two countries - India and Bangladesh.
19 Books & Literature • Literary Personalities निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि किस तिथि को मनाई जाती है? निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि किस तिथि को मनाई जाती है? सेव करें Save सेव्ड Saved A. भाद्रपद 1 भाद्रपद 1 B. श्रावण 22 श्रावण 22 C. आश्विन 5 आश्विन 5 D. कार्तिक 15 कार्तिक 15 उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B बांग्लादेश में टैगोर की पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। In Bangladesh, Tagore's death anniversary is observed on 22 Shravan according to the Bengali calendar.
20 Books & Literature • Literary Personalities निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार रवीन्द्रनाथ टैगोर का निधन कब हुआ था? निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।आज बांग्लादेश में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 82वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, रवीन्द्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन बांग्लादेश में उनकी पुण्यतिथि बंगाली पंचांग के श्रावण 22 को मनाई जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय कवि थे। उन्होंने 1913 में कविताओं के संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद के लिए यह पुरस्कार जीता था। टैगोर को दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है - भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का अमर सोनार बांग्ला। रवीन्द्रनाथ ने अपने संगीत और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल की संस्कृति पर एक गहरी छाप छोड़ी।उन्होंने तत्कालीन पूर्वी बंगाल, जो अब बांग्लादेश है, में लंबा समय बिताया। उन्होंने कुश्तिया के शिलाईदह, सिराजगंज के शाहजादपुर और नोगांव के पतिसर में रहते हुए कई अमर कविताएँ और गीत रचे। ये सभी स्थान अब बांग्लादेश में हैं।गद्यांश के अनुसार, ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार रवीन्द्रनाथ टैगोर का निधन कब हुआ था? सेव करें Save सेव्ड Saved A. 6 अगस्त 1940 6 अगस्त 1940 B. 7 अगस्त 1941 7 अगस्त 1941 C. 8 अगस्त 1942 8 अगस्त 1942 D. 22 अगस्त 1943 22 अगस्त 1943 उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B रवीन्द्रनाथ टैगोर का निधन 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में हुआ था। Rabindranath Tagore died on 7 August 1941 at the age of 80.