Sardari Andolan सरदारी आंदोलन

सरदारी आंदोलन झारखण्ड के उराँव एवं मुंडा समुदाय द्वारा अपनी पारंपरिक भूमि (मुल्की-मिल्की) के अधिकारों की पुनर्प्राप्ति हेतु चलाया गया एक दीर्घकालीन भूमि आंदोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों, जमींदारों एवं बाहरी लोगों द्वारा हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना तथा पारंपरिक भूमि व्यवस्था की रक्षा करना था।

Tribal Rebellions in Jharkhand झारखण्ड में जनजातीय विद्रोह

सरदारी आंदोलन (1858–1895)

सरदारी आंदोलन झारखण्ड के उराँव एवं मुंडा समुदाय द्वारा अपनी पारंपरिक भूमि (मुल्की-मिल्की) के अधिकारों की पुनर्प्राप्ति हेतु चलाया गया एक दीर्घकालीन भूमि आंदोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों, जमींदारों एवं बाहरी लोगों द्वारा हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना तथा पारंपरिक भूमि व्यवस्था की रक्षा करना था।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
  • काल : 1858–1895 ई.
  • अन्य नाम : मुल्की-मिल्की आंदोलन
  • मुख्य उद्देश्य : भूमि अधिकारों की पुनर्प्राप्ति
  • मुख्य क्षेत्र : छोटानागपुर
  • मुख्य समुदाय : उराँव एवं मुंडा
  • मुख्य स्वरूप : भूमि आंदोलन → पुनर्स्थापना आंदोलन → राजनीतिक आंदोलन

आंदोलन की पृष्ठभूमि

  • कोल विद्रोह (1831–32) के दौरान अनेक सरदार असम के चाय बागानों में काम करने चले गए थे।
  • वापस लौटने पर उन्होंने पाया कि उनकी भूमि पर अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया है।
  • जमींदारों द्वारा जबरन लगान वसूली तथा किराए में वृद्धि ने असंतोष को और बढ़ाया।
  • भूमि वापस पाने के लिए सरदारों ने संगठित आंदोलन प्रारंभ किया।

आंदोलन के प्रमुख कारण

  • पारंपरिक भूमि पर बाहरी लोगों का कब्जा।
  • जमींदारों द्वारा अत्यधिक लगान एवं अवैध वसूली।
  • आदिवासियों की भूमि वापस न करना।
  • ब्रिटिश प्रशासन द्वारा जमींदारों का संरक्षण।

आंदोलन के तीन चरण

चरण अवधि मुख्य स्वरूप
प्रथम चरण 1858–1881 भूमि आंदोलन
द्वितीय चरण 1881–1890 पुनर्स्थापना आंदोलन
तृतीय चरण 1890–1895 राजनीतिक आंदोलन

प्रथम चरण (1858–1881)

  • मुख्य उद्देश्य हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना था।
  • आंदोलन का प्रमुख केंद्र छोटानागपुर था।
  • तोरपा, खूँटी, सोनपुर एवं बसिया इसके प्रमुख केंद्र बने।
  • भूमि विवादों की जाँच के लिए सरकार ने सर्वेक्षण कराया।
  • 1869 ई. में छोटानागपुर टेन्योर एक्ट लागू किया गया।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत कई किसानों को भूमि वापस मिली, किन्तु सभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

द्वितीय चरण (1881–1890)

  • इस चरण का उद्देश्य पारंपरिक सामाजिक एवं भूमि व्यवस्था की पुनर्स्थापना था।
  • आंदोलन अधिक संगठित स्वरूप में आगे बढ़ा।

तृतीय चरण (1890–1895)

  • इस चरण में आंदोलन का स्वरूप राजनीतिक हो गया।
  • आदिवासियों ने मिशनरियों एवं प्रशासन से भूमि वापसी की मांग की।
  • ब्रिटिश सरकार द्वारा जमींदारों का समर्थन किए जाने से आदिवासियों का विश्वास समाप्त हो गया।
  • 1892 ई. में कुछ स्थानों पर मिशनरियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रयास किया गया, परंतु नेतृत्व के अभाव में आंदोलन सफल नहीं हो सका।
  • बाद में इस आंदोलन की विचारधारा बिरसा आंदोलन में समाहित हो गई।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण
  • सरदारी आंदोलन को मुल्की-मिल्की आंदोलन भी कहा जाता है।
  • यह मुख्यतः भूमि अधिकारों से संबंधित आंदोलन था।
  • आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण अधिनियम छोटानागपुर टेन्योर एक्ट, 1869 माना जाता है।
  • सरदारी आंदोलन ने आगे चलकर बिरसा आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार की।

Exam Trap

  • सरदारी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भूमि की पुनर्प्राप्ति था, धार्मिक सुधार नहीं।
  • छोटानागपुर टेन्योर एक्ट (1869) को सीएनटी एक्ट (1908) से भ्रमित न करें।
  • सरदारी आंदोलन, बिरसा आंदोलन का पूर्ववर्ती भूमि आंदोलन था।


MCQs – सरदारी आंदोलन (1858–1895)

1. सरदारी आंदोलन को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
  • A. हूल आंदोलन
  • B. मुल्की-मिल्की आंदोलन
  • C. उलगुलान आंदोलन
  • D. टाना भगत आंदोलन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. मुल्की-मिल्की आंदोलन

व्याख्या: सरदारी आंदोलन को 'मुल्की-मिल्की (मातृभूमि एवं जमीन)' आंदोलन भी कहा जाता है, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की भूमि वापस प्राप्त करना था।


2. सरदारी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  • A. अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना
  • B. धार्मिक सुधार करना
  • C. हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना
  • D. अलग राज्य की स्थापना करना
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना

व्याख्या: यह आंदोलन मुख्यतः आदिवासियों की पारंपरिक भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए चलाया गया था।


3. सरदारी आंदोलन किस अवधि तक चला?
  • A. 1831–1832 ई.
  • B. 1855–1856 ई.
  • C. 1858–1895 ई.
  • D. 1895–1900 ई.
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. 1858–1895 ई.

व्याख्या: सरदारी आंदोलन लगभग 37 वर्षों तक चला और इसे तीन चरणों में विभाजित किया जाता है।


4. सरदारी आंदोलन मुख्यतः किन जनजातियों द्वारा संचालित किया गया?
  • A. संथाल एवं पहाड़िया
  • B. उराँव एवं मुंडा
  • C. चेरो एवं भोगता
  • D. भूमिज एवं हो
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. उराँव एवं मुंडा

व्याख्या: इस आंदोलन में उराँव एवं मुंडा समुदाय के सरदारों की प्रमुख भूमिका रही।


5. सरदारी आंदोलन के प्रथम चरण का मुख्य स्वरूप क्या था?
  • A. धार्मिक आंदोलन
  • B. राजनीतिक आंदोलन
  • C. भूमि आंदोलन
  • D. किसान आंदोलन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. भूमि आंदोलन

व्याख्या: प्रथम चरण (1858–1881) का मुख्य उद्देश्य हड़पी गई भूमि की पुनर्प्राप्ति था।


6. सरदारी आंदोलन के प्रभाव से 1869 ई. में कौन-सा अधिनियम लागू किया गया?
  • A. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908
  • B. विल्किन्सन नियम
  • C. छोटानागपुर टेन्योर एक्ट
  • D. संथाल परगना टेनेंसी एक्ट
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. छोटानागपुर टेन्योर एक्ट

व्याख्या: 1869 ई. में छोटानागपुर टेन्योर एक्ट लागू किया गया, जिससे अनेक किसानों को भूमि वापस मिली।


7. सरदारी आंदोलन के द्वितीय चरण (1881–1890) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  • A. स्वतंत्रता प्राप्त करना
  • B. पारंपरिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना
  • C. अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध
  • D. नया राज्य स्थापित करना
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. पारंपरिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना

व्याख्या: दूसरे चरण में आंदोलन का लक्ष्य पारंपरिक सामाजिक एवं भूमि व्यवस्था को पुनः स्थापित करना था।


8. सरदारी आंदोलन के तृतीय चरण (1890–1895) का स्वरूप क्या हो गया था?
  • A. धार्मिक
  • B. आर्थिक
  • C. राजनीतिक
  • D. सांस्कृतिक
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. राजनीतिक

व्याख्या: तृतीय चरण में आंदोलन भूमि विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक स्वरूप धारण कर गया।


9. सरदारी आंदोलन आगे चलकर किस आंदोलन की पृष्ठभूमि बना?
  • A. संथाल विद्रोह
  • B. कोल विद्रोह
  • C. बिरसा आंदोलन (उलगुलान)
  • D. टाना भगत आंदोलन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. बिरसा आंदोलन (उलगुलान)

व्याख्या: सरदारी आंदोलन ने भूमि अधिकारों के प्रश्न को मजबूत किया, जिसने आगे चलकर बिरसा आंदोलन को आधार प्रदान किया।


10. निम्नलिखित में से सरदारी आंदोलन के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
  • A. इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक सुधार था।
  • B. यह केवल संथाल परगना तक सीमित था।
  • C. इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की भूमि वापस प्राप्त करना था।
  • D. इसका नेतृत्व सिद्धू-कान्हू ने किया था।
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की भूमि वापस प्राप्त करना था।

व्याख्या: सरदारी आंदोलन एक दीर्घकालीन भूमि अधिकार आंदोलन था, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की पारंपरिक भूमि की पुनर्प्राप्ति था।

सरदारी आंदोलन (1858–1895)

सरदारी आंदोलन झारखण्ड के उराँव एवं मुंडा समुदाय द्वारा अपनी पारंपरिक भूमि (मुल्की-मिल्की) के अधिकारों की पुनर्प्राप्ति हेतु चलाया गया एक दीर्घकालीन भूमि आंदोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों, जमींदारों एवं बाहरी लोगों द्वारा हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना तथा पारंपरिक भूमि व्यवस्था की रक्षा करना था।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
  • काल : 1858–1895 ई.
  • अन्य नाम : मुल्की-मिल्की आंदोलन
  • मुख्य उद्देश्य : भूमि अधिकारों की पुनर्प्राप्ति
  • मुख्य क्षेत्र : छोटानागपुर
  • मुख्य समुदाय : उराँव एवं मुंडा
  • मुख्य स्वरूप : भूमि आंदोलन → पुनर्स्थापना आंदोलन → राजनीतिक आंदोलन

आंदोलन की पृष्ठभूमि

  • कोल विद्रोह (1831–32) के दौरान अनेक सरदार असम के चाय बागानों में काम करने चले गए थे।
  • वापस लौटने पर उन्होंने पाया कि उनकी भूमि पर अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया है।
  • जमींदारों द्वारा जबरन लगान वसूली तथा किराए में वृद्धि ने असंतोष को और बढ़ाया।
  • भूमि वापस पाने के लिए सरदारों ने संगठित आंदोलन प्रारंभ किया।

आंदोलन के प्रमुख कारण

  • पारंपरिक भूमि पर बाहरी लोगों का कब्जा।
  • जमींदारों द्वारा अत्यधिक लगान एवं अवैध वसूली।
  • आदिवासियों की भूमि वापस न करना।
  • ब्रिटिश प्रशासन द्वारा जमींदारों का संरक्षण।

आंदोलन के तीन चरण

चरण अवधि मुख्य स्वरूप
प्रथम चरण 1858–1881 भूमि आंदोलन
द्वितीय चरण 1881–1890 पुनर्स्थापना आंदोलन
तृतीय चरण 1890–1895 राजनीतिक आंदोलन

प्रथम चरण (1858–1881)

  • मुख्य उद्देश्य हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना था।
  • आंदोलन का प्रमुख केंद्र छोटानागपुर था।
  • दोइसा , खुखरा , सोनपुर एवं बसिया इसके प्रमुख केंद्र बने।
  • भूमि विवादों की जाँच के लिए सरकार ने सर्वेक्षण कराया।
  • 1869 ई. में छोटानागपुर टेन्योर एक्ट लागू किया गया।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत कई किसानों को भूमि वापस मिली, किन्तु सभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

द्वितीय चरण (1881–1890)

  • इस चरण का उद्देश्य पारंपरिक सामाजिक एवं भूमि व्यवस्था की पुनर्स्थापना था।
  • आंदोलन अधिक संगठित स्वरूप में आगे बढ़ा।

तृतीय चरण (1890–1895)

  • इस चरण में आंदोलन का स्वरूप राजनीतिक हो गया।
  • आदिवासियों ने मिशनरियों एवं प्रशासन से भूमि वापसी की मांग की।
  • ब्रिटिश सरकार द्वारा जमींदारों का समर्थन किए जाने से आदिवासियों का विश्वास समाप्त हो गया।
  • 1892 ई. में कुछ स्थानों पर मिशनरियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रयास किया गया, परंतु नेतृत्व के अभाव में आंदोलन सफल नहीं हो सका।
  • बाद में इस आंदोलन की विचारधारा बिरसा आंदोलन में समाहित हो गई।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण
  • सरदारी आंदोलन को मुल्की-मिल्की आंदोलन भी कहा जाता है।
  • यह मुख्यतः भूमि अधिकारों से संबंधित आंदोलन था।
  • आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण अधिनियम छोटानागपुर टेन्योर एक्ट, 1869 माना जाता है।
  • सरदारी आंदोलन ने आगे चलकर बिरसा आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार की।

Exam Trap

  • सरदारी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भूमि की पुनर्प्राप्ति था, धार्मिक सुधार नहीं।
  • छोटानागपुर टेन्योर एक्ट (1869) को सीएनटी एक्ट (1908) से भ्रमित न करें।
  • सरदारी आंदोलन, बिरसा आंदोलन का पूर्ववर्ती भूमि आंदोलन था।


MCQs – सरदारी आंदोलन (1858–1895)

1. सरदारी आंदोलन को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
  • A. हूल आंदोलन
  • B. मुल्की-मिल्की आंदोलन
  • C. उलगुलान आंदोलन
  • D. टाना भगत आंदोलन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. मुल्की-मिल्की आंदोलन

व्याख्या: सरदारी आंदोलन को 'मुल्की-मिल्की (मातृभूमि एवं जमीन)' आंदोलन भी कहा जाता है, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की भूमि वापस प्राप्त करना था।


2. सरदारी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  • A. अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना
  • B. धार्मिक सुधार करना
  • C. हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना
  • D. अलग राज्य की स्थापना करना
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. हड़पी गई भूमि को वापस प्राप्त करना

व्याख्या: यह आंदोलन मुख्यतः आदिवासियों की पारंपरिक भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए चलाया गया था।


3. सरदारी आंदोलन किस अवधि तक चला?
  • A. 1831–1832 ई.
  • B. 1855–1856 ई.
  • C. 1858–1895 ई.
  • D. 1895–1900 ई.
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. 1858–1895 ई.

व्याख्या: सरदारी आंदोलन लगभग 37 वर्षों तक चला और इसे तीन चरणों में विभाजित किया जाता है।


4. सरदारी आंदोलन मुख्यतः किन जनजातियों द्वारा संचालित किया गया?
  • A. संथाल एवं पहाड़िया
  • B. उराँव एवं मुंडा
  • C. चेरो एवं भोगता
  • D. भूमिज एवं हो
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. उराँव एवं मुंडा

व्याख्या: इस आंदोलन में उराँव एवं मुंडा समुदाय के सरदारों की प्रमुख भूमिका रही।


5. सरदारी आंदोलन के प्रथम चरण का मुख्य स्वरूप क्या था?
  • A. धार्मिक आंदोलन
  • B. राजनीतिक आंदोलन
  • C. भूमि आंदोलन
  • D. किसान आंदोलन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. भूमि आंदोलन

व्याख्या: प्रथम चरण (1858–1881) का मुख्य उद्देश्य हड़पी गई भूमि की पुनर्प्राप्ति था।


6. सरदारी आंदोलन के प्रभाव से 1869 ई. में कौन-सा अधिनियम लागू किया गया?
  • A. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908
  • B. विल्किन्सन नियम
  • C. छोटानागपुर टेन्योर एक्ट
  • D. संथाल परगना टेनेंसी एक्ट
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. छोटानागपुर टेन्योर एक्ट

व्याख्या: 1869 ई. में छोटानागपुर टेन्योर एक्ट लागू किया गया, जिससे अनेक किसानों को भूमि वापस मिली।


7. सरदारी आंदोलन के द्वितीय चरण (1881–1890) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  • A. स्वतंत्रता प्राप्त करना
  • B. पारंपरिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना
  • C. अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध
  • D. नया राज्य स्थापित करना
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. पारंपरिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना

व्याख्या: दूसरे चरण में आंदोलन का लक्ष्य पारंपरिक सामाजिक एवं भूमि व्यवस्था को पुनः स्थापित करना था।


8. सरदारी आंदोलन के तृतीय चरण (1890–1895) का स्वरूप क्या हो गया था?
  • A. धार्मिक
  • B. आर्थिक
  • C. राजनीतिक
  • D. सांस्कृतिक
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. राजनीतिक

व्याख्या: तृतीय चरण में आंदोलन भूमि विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक स्वरूप धारण कर गया।


9. सरदारी आंदोलन आगे चलकर किस आंदोलन की पृष्ठभूमि बना?
  • A. संथाल विद्रोह
  • B. कोल विद्रोह
  • C. बिरसा आंदोलन (उलगुलान)
  • D. टाना भगत आंदोलन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. बिरसा आंदोलन (उलगुलान)

व्याख्या: सरदारी आंदोलन ने भूमि अधिकारों के प्रश्न को मजबूत किया, जिसने आगे चलकर बिरसा आंदोलन को आधार प्रदान किया।


10. निम्नलिखित में से सरदारी आंदोलन के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
  • A. इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक सुधार था।
  • B. यह केवल संथाल परगना तक सीमित था।
  • C. इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की भूमि वापस प्राप्त करना था।
  • D. इसका नेतृत्व सिद्धू-कान्हू ने किया था।
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की भूमि वापस प्राप्त करना था।

व्याख्या: सरदारी आंदोलन एक दीर्घकालीन भूमि अधिकार आंदोलन था, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की पारंपरिक भूमि की पुनर्प्राप्ति था।