Birsa Ulgulan बिरसा उलगुलान

बिरसा आंदोलन (उलगुलान) झारखण्ड के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण जनजातीय आंदोलन माना जाता है। इसका नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया। यह आंदोलन अंग्रेजी शासन, जमींदारों, महाजनों तथा दिकुओं के शोषण के विरुद्ध तथा मुंडा राज की स्थापना एवं आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया गया। यह आंदोलन धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सुधारों का समन्वित आंदोलन था।

Tribal Rebellions in Jharkhand झारखण्ड में जनजातीय विद्रोह

बिरसा आंदोलन (1895–1900)

बिरसा आंदोलन (उलगुलान) झारखण्ड के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण जनजातीय आंदोलन माना जाता है। इसका नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया। यह आंदोलन अंग्रेजी शासन, जमींदारों, महाजनों तथा दिकुओं के शोषण के विरुद्ध तथा मुंडा राज की स्थापना एवं आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया गया। यह आंदोलन धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सुधारों का समन्वित आंदोलन था।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
  • काल : 1895–1900 ई.
  • प्रमुख नेता : बिरसा मुंडा
  • मुख्य क्षेत्र : छोटानागपुर (खूंटी, राँची, सिंहभूम, सरायकेला)
  • मुख्यालय : खूंटी
  • अन्य नाम : उलगुलान (महान हलचल)
  • स्वरूप : धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन

उलगुलान का अर्थ

उलगुलान का अर्थ है "महान हलचल" अथवा "महान विद्रोह"। बिरसा मुंडा ने इसे केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं, बल्कि आदिवासियों के सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक पुनर्जागरण का माध्यम बनाया।

आंदोलन के प्रमुख कारण

  • मुंडाओं की खूँटकट्टी भूमि व्यवस्था का विघटन।
  • अंग्रेजों द्वारा जमींदारों एवं ठेकेदारों को संरक्षण देना।
  • दिकुओं (बाहरी लोगों) द्वारा आदिवासियों की भूमि पर कब्जा।
  • महाजनों द्वारा अत्यधिक ब्याज एवं आर्थिक शोषण।
  • वन कानूनों के कारण पारंपरिक अधिकारों का हनन।
  • ईसाई मिशनरियों द्वारा धार्मिक हस्तक्षेप एवं धर्म परिवर्तन के प्रयास।
  • सरदारी आंदोलन की असफलता के बाद आदिवासियों में बढ़ता असंतोष।

आंदोलन के उद्देश्य

  • आदिवासियों की छीनी गई भूमि वापस प्राप्त करना।
  • मुंडा राज की स्थापना करना।
  • अंग्रेजी शासन एवं दिकुओं के शोषण का अंत करना।
  • आदिवासी समाज में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार लाना।
  • पारंपरिक संस्कृति एवं रीति-रिवाजों की रक्षा करना।

बिरसा मुंडा के धार्मिक एवं सामाजिक सुधार

  • एकेश्वरवाद का प्रचार करते हुए सिंगबोंगा की उपासना पर बल दिया।
  • अंधविश्वास, जादू-टोना एवं पशुबलि का विरोध किया।
  • मांस, मदिरा एवं नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने की प्रेरणा दी।
  • स्वच्छता, नैतिक जीवन एवं अनुशासन पर विशेष बल दिया।
  • आपसी एकता एवं सामाजिक संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया।

बिरसाइट धर्म

बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों के लिए बिरसाइट धर्म की स्थापना की। इस धर्म में सिंगबोंगा की उपासना, नैतिक जीवन, स्वच्छता, सत्य एवं सामाजिक एकता पर विशेष बल दिया गया। इसके अनुयायी बिरसाइट कहलाए।

प्रमुख सहयोगी

  • गया मुंडा
  • सोमा मुंडा
  • डोंका मुंडा
  • जॉन मुंडा
  • माकी मुंडा

प्रथम चरण (1895–1897)

  • इस चरण में आंदोलन का स्वरूप मुख्यतः धार्मिक एवं सामाजिक सुधार का था।
  • बिरसा मुंडा ने गाँव-गाँव जाकर लोगों को संगठित किया।
  • उन्होंने लोगों से अंग्रेजों को कर न देने तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
  • आंदोलन का मुख्य केंद्र खूंटी था।

प्रथम गिरफ्तारी एवं रिहाई

  • 24 अगस्त 1895 को बिरसा मुंडा को चलकद गाँव से गिरफ्तार किया गया।
  • उन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर दो वर्ष के कारावास की सजा दी गई।
  • 30 नवम्बर 1897 को उन्हें हजारीबाग जेल से रिहा किया गया।
  • रिहाई के बाद उन्होंने आंदोलन को पुनः संगठित किया, जो आगे चलकर अधिक उग्र रूप में सामने आया।
महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
  • उलगुलान का अर्थ — महान हलचल / महान विद्रोह
  • आंदोलन का मुख्यालय — खूंटी
  • प्रथम गिरफ्तारी — 24 अगस्त 1895
  • प्रथम रिहाई — 30 नवम्बर 1897
  • मुख्य उद्देश्य — मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा
  • बिरसा द्वारा स्थापित धर्म — बिरसाइट धर्म

द्वितीय चरण (1897–1900)

30 नवम्बर 1897 को जेल से रिहा होने के बाद बिरसा मुंडा ने आंदोलन को नए स्वरूप में संगठित किया। इस चरण में आंदोलन धार्मिक एवं सामाजिक सुधार से आगे बढ़कर अंग्रेजी शासन एवं दिकुओं के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष में परिवर्तित हो गया।

उलगुलान का आरम्भ

  • 22 दिसम्बर 1899 को बिरसा मुंडा ने उलगुलान (महान विद्रोह) का औपचारिक आह्वान किया।
  • विद्रोह का उद्देश्य अंग्रेजी शासन का अंत कर "मुंडा राज" की स्थापना करना था।
  • विद्रोहियों ने अनेक पुलिस चौकियों, मिशन केन्द्रों तथा सरकारी प्रतिष्ठानों पर आक्रमण किए।
  • खूंटी, तामाड़, तोरपा, बसिया, कर्रा एवं आसपास के क्षेत्रों में आंदोलन तीव्र गति से फैल गया।

डोम्बारी बुरू की घटना

  • 9 जनवरी 1900 को डोम्बारी बुरू (सईल रकब पहाड़ी) पर हजारों आदिवासी एकत्रित हुए।
  • अंग्रेजों ने सभा को तितर-बितर करने का आदेश दिया, जिसे विद्रोहियों ने अस्वीकार कर दिया।
  • इसके बाद अंग्रेजी सेना ने निहत्थे आदिवासियों पर गोलियाँ चला दीं।
  • इस गोलीकांड में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएँ एवं बच्चे शहीद हुए।
  • डोम्बारी बुरू की घटना को बिरसा आंदोलन का सबसे रक्तरंजित अध्याय माना जाता है।

आंदोलन का दमन

  • डोम्बारी बुरू की घटना के बाद अंग्रेजों ने बड़े पैमाने पर दमन अभियान चलाया।
  • अनेक गाँवों में तलाशी अभियान चलाकर विद्रोहियों को गिरफ्तार किया गया।
  • बिरसा मुंडा के अनेक सहयोगियों को कारावास एवं कठोर दंड दिया गया।

द्वितीय गिरफ्तारी

  • 3 मार्च 1900 को बिरसा मुंडा को जमकोपाई (चक्रधरपुर के निकट) के जंगल से गिरफ्तार किया गया।
  • गिरफ्तारी के समय उनके साथ कुछ विश्वस्त अनुयायी भी मौजूद थे।
  • उन्हें राँची जेल में बंद किया गया।

बिरसा मुंडा की मृत्यु

  • 9 जून 1900 को राँची जेल में बिरसा मुंडा की मृत्यु हो गई।
  • सरकारी अभिलेखों में मृत्यु का कारण हैजा (Cholera) बताया गया।
  • हालाँकि अनेक इतिहासकार एवं स्थानीय परंपराएँ उनकी मृत्यु को संदिग्ध मानती हैं।

आंदोलन के परिणाम एवं प्रभाव

  • अंग्रेजी सरकार ने छोटानागपुर की भूमि व्यवस्था का पुनः अध्ययन कराया।
  • आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकारों को कानूनी संरक्षण देने की आवश्यकता स्वीकार की गई।
  • छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908 लागू किया गया।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने पर प्रतिबंध लगाया गया।
  • बिरसा आंदोलन ने झारखण्ड में जनजातीय अस्मिता एवं अधिकारों के संघर्ष को नई दिशा प्रदान की।

बिरसा आंदोलन का महत्व

  • यह झारखण्ड का सबसे व्यापक एवं प्रभावशाली जनजातीय आंदोलन माना जाता है।
  • इसने धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक चेतना का विकास किया।
  • भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए आगे चलकर अनेक कानूनों एवं आंदोलनों की प्रेरणा बना।
  • बिरसा मुंडा आज भी आदिवासी स्वाभिमान एवं संघर्ष के प्रतीक माने जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
  • उलगुलान का औपचारिक आरम्भ : 22 दिसम्बर 1899
  • डोम्बारी बुरू गोलीकांड : 9 जनवरी 1900
  • द्वितीय गिरफ्तारी : 3 मार्च 1900 (जमकोपाई जंगल)
  • मृत्यु : 9 जून 1900, राँची जेल
  • प्रमुख उपलब्धि : छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908
  • मुख्य उद्देश्य : मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा

JSSC/JPSC Quick Revision

  • उलगुलान = महान हलचल / महान विद्रोह
  • मुख्यालय = खूंटी
  • प्रथम गिरफ्तारी = 24 अगस्त 1895
  • प्रथम रिहाई = 30 नवम्बर 1897
  • उलगुलान का आह्वान = 22 दिसम्बर 1899
  • डोम्बारी बुरू गोलीकांड = 9 जनवरी 1900
  • द्वितीय गिरफ्तारी = 3 मार्च 1900
  • मृत्यु = 9 जून 1900 (राँची जेल)
  • परिणाम = CNT Act, 1908

एक नजर में (Chapter Summary)

  • काल : 1895–1900 ई.
  • नेता : बिरसा मुंडा
  • अन्य नाम : उलगुलान (महान हलचल)
  • मुख्यालय : खूंटी
  • मुख्य उद्देश्य : मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा
  • प्रथम गिरफ्तारी : 24 अगस्त 1895
  • प्रथम रिहाई : 30 नवम्बर 1897
  • उलगुलान का आरम्भ : 22 दिसम्बर 1899
  • डोम्बारी बुरू गोलीकांड : 9 जनवरी 1900
  • द्वितीय गिरफ्तारी : 3 मार्च 1900
  • मृत्यु : 9 जून 1900 (राँची जेल)
  • प्रमुख परिणाम : छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908


MCQs – बिरसा आंदोलन (1895–1900)

1. 'उलगुलान' शब्द का अर्थ क्या है?
  • A. नया शासन
  • B. महान हलचल / महान विद्रोह
  • C. धार्मिक सभा
  • D. भूमि सुधार
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. महान हलचल / महान विद्रोह

व्याख्या: बिरसा आंदोलन को 'उलगुलान' कहा जाता है, जिसका अर्थ है महान हलचल अथवा महान विद्रोह।

2. बिरसा आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  • A. पृथक झारखण्ड राज्य की स्थापना
  • B. अंग्रेजों से व्यापारिक अधिकार प्राप्त करना
  • C. मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा
  • D. केवल धार्मिक सुधार करना
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा

व्याख्या: बिरसा मुंडा का उद्देश्य अंग्रेजी शासन एवं दिकुओं के शोषण का अंत कर मुंडा राज की स्थापना करना था।

3. बिरसा मुंडा को पहली बार कब गिरफ्तार किया गया था?
  • A. 30 नवम्बर 1897
  • B. 22 दिसम्बर 1899
  • A. 24 अगस्त 1895
  • D. 3 मार्च 1900
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. 24 अगस्त 1895

व्याख्या: बिरसा मुंडा को 24 अगस्त 1895 को चलकद गाँव से गिरफ्तार कर दो वर्ष के कारावास की सजा दी गई थी।

4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

1. बिरसा आंदोलन का मुख्य केंद्र खूंटी था।
2. बिरसा मुंडा ने बिरसाइट धर्म की स्थापना की।
3. बिरसा आंदोलन का उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार था।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: A. केवल 1 और 2

व्याख्या: बिरसा आंदोलन धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन था; इसका उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार नहीं था।

5. डोम्बारी बुरू गोलीकांड कब हुआ था?
  • A. 24 अगस्त 1895
  • B. 30 नवम्बर 1897
  • C. 22 दिसम्बर 1899
  • D. 9 जनवरी 1900
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: D. 9 जनवरी 1900

व्याख्या: डोम्बारी बुरू (सईल रकब पहाड़ी) पर 9 जनवरी 1900 को अंग्रेजों द्वारा निहत्थे आदिवासियों पर गोली चलाई गई थी।

6. निम्नलिखित घटनाओं का सही कालानुक्रम क्या है?
  • A. प्रथम गिरफ्तारी → प्रथम रिहाई → उलगुलान → डोम्बारी बुरू → द्वितीय गिरफ्तारी
  • B. उलगुलान → प्रथम गिरफ्तारी → डोम्बारी बुरू → प्रथम रिहाई → द्वितीय गिरफ्तारी
  • C. प्रथम गिरफ्तारी → उलगुलान → प्रथम रिहाई → द्वितीय गिरफ्तारी → डोम्बारी बुरू
  • D. प्रथम रिहाई → प्रथम गिरफ्तारी → उलगुलान → डोम्बारी बुरू → द्वितीय गिरफ्तारी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: A. प्रथम गिरफ्तारी → प्रथम रिहाई → उलगुलान → डोम्बारी बुरू → द्वितीय गिरफ्तारी

व्याख्या: 24 अगस्त 1895 → 30 नवम्बर 1897 → 22 दिसम्बर 1899 → 9 जनवरी 1900 → 3 मार्च 1900।

7. बिरसा मुंडा की मृत्यु के बाद आदिवासी भूमि अधिकारों की रक्षा हेतु कौन-सा अधिनियम लागू किया गया?
  • A. विल्किन्सन नियम
  • B. संथाल परगना टेनेंसी एक्ट
  • C. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908
  • D. पेसा अधिनियम
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908

व्याख्या: बिरसा आंदोलन के प्रभाव से 1908 में CNT Act लागू किया गया, जिसने आदिवासी भूमि के संरक्षण को कानूनी आधार प्रदान किया।

8. कथन (A): बिरसा मुंडा ने बिरसाइट धर्म की स्थापना की।

कारण (R): इस धर्म में सिंगबोंगा की उपासना, नैतिक जीवन एवं सामाजिक सुधार पर बल दिया गया।
  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है, R गलत है।
  • D. A गलत है, R सही है।
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।

व्याख्या: बिरसाइट धर्म सामाजिक सुधार, नैतिक जीवन, स्वच्छता तथा सिंगबोंगा की उपासना पर आधारित था।

9. बिरसा मुंडा को दूसरी बार कहाँ से गिरफ्तार किया गया था?
  • A. चलकद
  • B. डोम्बारी बुरू
  • C. जमकोपाई का जंगल
  • D. खूंटी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. जमकोपाई का जंगल

व्याख्या: 3 मार्च 1900 को बिरसा मुंडा को जमकोपाई के जंगल से गिरफ्तार किया गया था।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन बिरसा आंदोलन के संबंध में सही है?
  • A. यह केवल धार्मिक आंदोलन था।
  • B. इसका मुख्यालय दुमका था।
  • C. यह धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन था।
  • D. इसका नेतृत्व गया मुंडा ने किया था।
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. यह धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन था।

व्याख्या: बिरसा आंदोलन केवल विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक सुधार, धार्मिक जागरण, भूमि अधिकार तथा राजनीतिक चेतना का व्यापक आंदोलन था।

बिरसा आंदोलन (1895–1900)

बिरसा आंदोलन (उलगुलान) झारखण्ड के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण जनजातीय आंदोलन माना जाता है। इसका नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया। यह आंदोलन अंग्रेजी शासन, जमींदारों, महाजनों तथा दिकुओं के शोषण के विरुद्ध तथा मुंडा राज की स्थापना एवं आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया गया। यह आंदोलन धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सुधारों का समन्वित आंदोलन था।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
  • काल : 1895–1900 ई.
  • प्रमुख नेता : बिरसा मुंडा
  • मुख्य क्षेत्र : छोटानागपुर (खूंटी, राँची, सिंहभूम, सरायकेला)
  • मुख्यालय : खूंटी
  • अन्य नाम : उलगुलान (महान हलचल)
  • स्वरूप : धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन

उलगुलान का अर्थ

उलगुलान का अर्थ है "महान हलचल" अथवा "महान विद्रोह"। बिरसा मुंडा ने इसे केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं, बल्कि आदिवासियों के सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक पुनर्जागरण का माध्यम बनाया।

आंदोलन के प्रमुख कारण

  • मुंडाओं की खूँटकट्टी भूमि व्यवस्था का विघटन।
  • अंग्रेजों द्वारा जमींदारों एवं ठेकेदारों को संरक्षण देना।
  • दिकुओं (बाहरी लोगों) द्वारा आदिवासियों की भूमि पर कब्जा।
  • महाजनों द्वारा अत्यधिक ब्याज एवं आर्थिक शोषण।
  • वन कानूनों के कारण पारंपरिक अधिकारों का हनन।
  • ईसाई मिशनरियों द्वारा धार्मिक हस्तक्षेप एवं धर्म परिवर्तन के प्रयास।
  • सरदारी आंदोलन की असफलता के बाद आदिवासियों में बढ़ता असंतोष।

आंदोलन के उद्देश्य

  • आदिवासियों की छीनी गई भूमि वापस प्राप्त करना।
  • मुंडा राज की स्थापना करना।
  • अंग्रेजी शासन एवं दिकुओं के शोषण का अंत करना।
  • आदिवासी समाज में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार लाना।
  • पारंपरिक संस्कृति एवं रीति-रिवाजों की रक्षा करना।

बिरसा मुंडा के धार्मिक एवं सामाजिक सुधार

  • एकेश्वरवाद का प्रचार करते हुए सिंगबोंगा की उपासना पर बल दिया।
  • अंधविश्वास, जादू-टोना एवं पशुबलि का विरोध किया।
  • मांस, मदिरा एवं नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने की प्रेरणा दी।
  • स्वच्छता, नैतिक जीवन एवं अनुशासन पर विशेष बल दिया।
  • आपसी एकता एवं सामाजिक संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया।

बिरसाइट धर्म

बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों के लिए बिरसाइट धर्म की स्थापना की। इस धर्म में सिंगबोंगा की उपासना, नैतिक जीवन, स्वच्छता, सत्य एवं सामाजिक एकता पर विशेष बल दिया गया। इसके अनुयायी बिरसाइट कहलाए।

प्रमुख सहयोगी

  • गया मुंडा
  • सोमा मुंडा
  • डोंका मुंडा
  • जॉन मुंडा
  • मानकी मुंडा

प्रथम चरण (1895–1897)

  • इस चरण में आंदोलन का स्वरूप मुख्यतः धार्मिक एवं सामाजिक सुधार का था।
  • बिरसा मुंडा ने गाँव-गाँव जाकर लोगों को संगठित किया।
  • उन्होंने लोगों से अंग्रेजों को कर न देने तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
  • आंदोलन का मुख्य केंद्र खूंटी था।

प्रथम गिरफ्तारी एवं रिहाई

  • 24 अगस्त 1895 को बिरसा मुंडा को चलकद गाँव से गिरफ्तार किया गया।
  • उन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर दो वर्ष के कारावास की सजा दी गई।
  • 30 नवम्बर 1897 को उन्हें हजारीबाग जेल से रिहा किया गया।
  • रिहाई के बाद उन्होंने आंदोलन को पुनः संगठित किया, जो आगे चलकर अधिक उग्र रूप में सामने आया।
महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
  • उलगुलान का अर्थ — महान हलचल / महान विद्रोह
  • आंदोलन का मुख्यालय — खूंटी
  • प्रथम गिरफ्तारी — 24 अगस्त 1895
  • प्रथम रिहाई — 30 नवम्बर 1897
  • मुख्य उद्देश्य — मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा
  • बिरसा द्वारा स्थापित धर्म — बिरसाइट धर्म

द्वितीय चरण (1897–1900)

30 नवम्बर 1897 को जेल से रिहा होने के बाद बिरसा मुंडा ने आंदोलन को नए स्वरूप में संगठित किया। इस चरण में आंदोलन धार्मिक एवं सामाजिक सुधार से आगे बढ़कर अंग्रेजी शासन एवं दिकुओं के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष में परिवर्तित हो गया।

उलगुलान का आरम्भ

  • 22 दिसम्बर 1899 को बिरसा मुंडा ने उलगुलान (महान विद्रोह) का औपचारिक आह्वान किया।
  • विद्रोह का उद्देश्य अंग्रेजी शासन का अंत कर "मुंडा राज" की स्थापना करना था।
  • विद्रोहियों ने अनेक पुलिस चौकियों, मिशन केन्द्रों तथा सरकारी प्रतिष्ठानों पर आक्रमण किए।
  • खूंटी, तामाड़, तोरपा, बसिया, कर्रा एवं आसपास के क्षेत्रों में आंदोलन तीव्र गति से फैल गया।

डोम्बारी बुरू की घटना

  • 9 जनवरी 1900 को डोम्बारी बुरू (सैल रकब पहाड़ी) पर हजारों आदिवासी एकत्रित हुए।
  • अंग्रेजों ने सभा को तितर-बितर करने का आदेश दिया, जिसे विद्रोहियों ने अस्वीकार कर दिया।
  • इसके बाद अंग्रेजी सेना ने निहत्थे आदिवासियों पर गोलियाँ चला दीं।
  • इस गोलीकांड में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएँ एवं बच्चे शहीद हुए।
  • डोम्बारी बुरू की घटना को बिरसा आंदोलन का सबसे रक्तरंजित अध्याय माना जाता है।

आंदोलन का दमन

  • डोम्बारी बुरू की घटना के बाद अंग्रेजों ने बड़े पैमाने पर दमन अभियान चलाया।
  • अनेक गाँवों में तलाशी अभियान चलाकर विद्रोहियों को गिरफ्तार किया गया।
  • बिरसा मुंडा के अनेक सहयोगियों को कारावास एवं कठोर दंड दिया गया।

द्वितीय गिरफ्तारी

  • 3 मार्च 1900 को बिरसा मुंडा को जमकोपाई (चक्रधरपुर के निकट) के जंगल से गिरफ्तार किया गया।
  • गिरफ्तारी के समय उनके साथ कुछ विश्वस्त अनुयायी भी मौजूद थे।
  • उन्हें राँची जेल में बंद किया गया।

बिरसा मुंडा की मृत्यु

  • 9 जून 1900 को राँची जेल में बिरसा मुंडा की मृत्यु हो गई।
  • सरकारी अभिलेखों में मृत्यु का कारण हैजा (Cholera) बताया गया।
  • हालाँकि अनेक इतिहासकार एवं स्थानीय परंपराएँ उनकी मृत्यु को संदिग्ध मानती हैं।

आंदोलन के परिणाम एवं प्रभाव

  • अंग्रेजी सरकार ने छोटानागपुर की भूमि व्यवस्था का पुनः अध्ययन कराया।
  • आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकारों को कानूनी संरक्षण देने की आवश्यकता स्वीकार की गई।
  • छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908 लागू किया गया।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने पर प्रतिबंध लगाया गया।
  • बिरसा आंदोलन ने झारखण्ड में जनजातीय अस्मिता एवं अधिकारों के संघर्ष को नई दिशा प्रदान की।

बिरसा आंदोलन का महत्व

  • यह झारखण्ड का सबसे व्यापक एवं प्रभावशाली जनजातीय आंदोलन माना जाता है।
  • इसने धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक चेतना का विकास किया।
  • भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए आगे चलकर अनेक कानूनों एवं आंदोलनों की प्रेरणा बना।
  • बिरसा मुंडा आज भी आदिवासी स्वाभिमान एवं संघर्ष के प्रतीक माने जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
  • उलगुलान का औपचारिक आरम्भ : 22 दिसम्बर 1899
  • डोम्बारी बुरू गोलीकांड : 9 जनवरी 1900
  • द्वितीय गिरफ्तारी : 3 मार्च 1900 (जमकोपाई जंगल)
  • मृत्यु : 9 जून 1900, राँची जेल
  • प्रमुख उपलब्धि : छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908
  • मुख्य उद्देश्य : मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा

JSSC/JPSC Quick Revision

  • उलगुलान = महान हलचल / महान विद्रोह
  • मुख्यालय = खूंटी
  • प्रथम गिरफ्तारी = 24 अगस्त 1895
  • प्रथम रिहाई = 30 नवम्बर 1897
  • उलगुलान का आह्वान = 22 दिसम्बर 1899
  • डोम्बारी बुरू गोलीकांड = 9 जनवरी 1900
  • द्वितीय गिरफ्तारी = 3 मार्च 1900
  • मृत्यु = 9 जून 1900 (राँची जेल)
  • परिणाम = CNT Act, 1908

एक नजर में (Chapter Summary)

  • काल : 1895–1900 ई.
  • नेता : बिरसा मुंडा
  • अन्य नाम : उलगुलान (महान हलचल)
  • मुख्यालय : खूंटी
  • मुख्य उद्देश्य : मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा
  • प्रथम गिरफ्तारी : 24 अगस्त 1895
  • प्रथम रिहाई : 30 नवम्बर 1897
  • उलगुलान का आरम्भ : 22 दिसम्बर 1899
  • डोम्बारी बुरू गोलीकांड : 9 जनवरी 1900
  • द्वितीय गिरफ्तारी : 3 मार्च 1900
  • मृत्यु : 9 जून 1900 (राँची जेल)
  • प्रमुख परिणाम : छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908


MCQs – बिरसा आंदोलन (1895–1900)

1. 'उलगुलान' शब्द का अर्थ क्या है?
  • A. नया शासन
  • B. महान हलचल / महान विद्रोह
  • C. धार्मिक सभा
  • D. भूमि सुधार
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: B. महान हलचल / महान विद्रोह

व्याख्या: बिरसा आंदोलन को 'उलगुलान' कहा जाता है, जिसका अर्थ है महान हलचल अथवा महान विद्रोह।

2. बिरसा आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  • A. पृथक झारखण्ड राज्य की स्थापना
  • B. अंग्रेजों से व्यापारिक अधिकार प्राप्त करना
  • C. मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा
  • D. केवल धार्मिक सुधार करना
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. मुंडा राज की स्थापना एवं भूमि अधिकारों की रक्षा

व्याख्या: बिरसा मुंडा का उद्देश्य अंग्रेजी शासन एवं दिकुओं के शोषण का अंत कर मुंडा राज की स्थापना करना था।

3. बिरसा मुंडा को पहली बार कब गिरफ्तार किया गया था?
  • A. 30 नवम्बर 1897
  • B. 22 दिसम्बर 1899
  • A. 24 अगस्त 1895
  • D. 3 मार्च 1900
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. 24 अगस्त 1895

व्याख्या: बिरसा मुंडा को 24 अगस्त 1895 को चलकद गाँव से गिरफ्तार कर दो वर्ष के कारावास की सजा दी गई थी।

4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

1. बिरसा आंदोलन का मुख्य केंद्र खूंटी था।
2. बिरसा मुंडा ने बिरसाइट धर्म की स्थापना की।
3. बिरसा आंदोलन का उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार था।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: A. केवल 1 और 2

व्याख्या: बिरसा आंदोलन धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन था; इसका उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार नहीं था।

5. डोम्बारी बुरू गोलीकांड कब हुआ था?
  • A. 24 अगस्त 1895
  • B. 30 नवम्बर 1897
  • C. 22 दिसम्बर 1899
  • D. 9 जनवरी 1900
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: D. 9 जनवरी 1900

व्याख्या: डोम्बारी बुरू (सईल रकब पहाड़ी) पर 9 जनवरी 1900 को अंग्रेजों द्वारा निहत्थे आदिवासियों पर गोली चलाई गई थी।

6. निम्नलिखित घटनाओं का सही कालानुक्रम क्या है?
  • A. प्रथम गिरफ्तारी → प्रथम रिहाई → उलगुलान → डोम्बारी बुरू → द्वितीय गिरफ्तारी
  • B. उलगुलान → प्रथम गिरफ्तारी → डोम्बारी बुरू → प्रथम रिहाई → द्वितीय गिरफ्तारी
  • C. प्रथम गिरफ्तारी → उलगुलान → प्रथम रिहाई → द्वितीय गिरफ्तारी → डोम्बारी बुरू
  • D. प्रथम रिहाई → प्रथम गिरफ्तारी → उलगुलान → डोम्बारी बुरू → द्वितीय गिरफ्तारी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: A. प्रथम गिरफ्तारी → प्रथम रिहाई → उलगुलान → डोम्बारी बुरू → द्वितीय गिरफ्तारी

व्याख्या: 24 अगस्त 1895 → 30 नवम्बर 1897 → 22 दिसम्बर 1899 → 9 जनवरी 1900 → 3 मार्च 1900।

7. बिरसा मुंडा की मृत्यु के बाद आदिवासी भूमि अधिकारों की रक्षा हेतु कौन-सा अधिनियम लागू किया गया?
  • A. विल्किन्सन नियम
  • B. संथाल परगना टेनेंसी एक्ट
  • C. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908
  • D. पेसा अधिनियम
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908

व्याख्या: बिरसा आंदोलन के प्रभाव से 1908 में CNT Act लागू किया गया, जिसने आदिवासी भूमि के संरक्षण को कानूनी आधार प्रदान किया।

8. कथन (A): बिरसा मुंडा ने बिरसाइट धर्म की स्थापना की।

कारण (R): इस धर्म में सिंगबोंगा की उपासना, नैतिक जीवन एवं सामाजिक सुधार पर बल दिया गया।
  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है, R गलत है।
  • D. A गलत है, R सही है।
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।

व्याख्या: बिरसाइट धर्म सामाजिक सुधार, नैतिक जीवन, स्वच्छता तथा सिंगबोंगा की उपासना पर आधारित था।

9. बिरसा मुंडा को दूसरी बार कहाँ से गिरफ्तार किया गया था?
  • A. चलकद
  • B. डोम्बारी बुरू
  • C. जमकोपाई का जंगल
  • D. खूंटी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. जमकोपाई का जंगल

व्याख्या: 3 मार्च 1900 को बिरसा मुंडा को जमकोपाई के जंगल से गिरफ्तार किया गया था।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन बिरसा आंदोलन के संबंध में सही है?
  • A. यह केवल धार्मिक आंदोलन था।
  • B. इसका मुख्यालय दुमका था।
  • C. यह धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन था।
  • D. इसका नेतृत्व गया मुंडा ने किया था।
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: C. यह धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आंदोलन था।

व्याख्या: बिरसा आंदोलन केवल विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक सुधार, धार्मिक जागरण, भूमि अधिकार तथा राजनीतिक चेतना का व्यापक आंदोलन था।