MCQs for JSSC

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MCQs for JSSC

श्रेणी: | परीक्षा: JSSC

4190 प्रश्न
1671
Hindi Language • अपठित गद्यांश
गद्यांश: “माता का हृदय”

सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।

बनारसीदास ने किसकी धरोहर वापस देने से इंकार कर दिया?
गद्यांश: “माता का हृदय”

सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।

बनारसीदास ने किसकी धरोहर वापस देने से इंकार कर दिया?
सही उत्तर: C Correct Answer: C
गद्यांश के अनुसार, बनारसीदास ने भिखारी की धरोहर लौटाने से इनकार किया था।
गद्यांश के अनुसार, बनारसीदास ने भिखारी की धरोहर लौटाने से इनकार किया था।
1672
Hindi Language • अपठित गद्यांश
गद्यांश: “माता का हृदय”

सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।

सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।

जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।

कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।

खोया हुआ बालक कुछ समय तक किसके पास रहा होगा?
गद्यांश: “माता का हृदय”

सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।

सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।

जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।

कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।

खोया हुआ बालक कुछ समय तक किसके पास रहा होगा?
सही उत्तर: C Correct Answer: C
गद्यांश के संदर्भ से बालक के कुछ समय तक भिखारिन के पास रहने का संकेत मिलता है।
गद्यांश के संदर्भ से बालक के कुछ समय तक भिखारिन के पास रहने का संकेत मिलता है।
1673
Hindi Language • अपठित गद्यांश
गद्यांश: “माता का हृदय”

सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।

अंगी भिखारिन किसे लेकर दोबारा बनारसीदास जी के घर आई थी?
गद्यांश: “माता का हृदय”

सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।

अंगी भिखारिन किसे लेकर दोबारा बनारसीदास जी के घर आई थी?
सही उत्तर: D Correct Answer: D
अंगी अपने बेटे को लेकर दोबारा बनारसीदास के घर आई थी।
अंगी अपने बेटे को लेकर दोबारा बनारसीदास के घर आई थी।
1674
Hindi Language • लिंग
“शेर” का स्त्रीलिंग रूप इनमें से कौन-सा है? “शेर” का स्त्रीलिंग रूप इनमें से कौन-सा है?
सही उत्तर: D Correct Answer: D
“शेर” का स्त्रीलिंग रूप “शेरनी” है।
“शेर” का स्त्रीलिंग रूप “शेरनी” है।
1675
Hindi Language • विलोम शब्द
“अमृत” का सही विलोम क्या है? “अमृत” का सही विलोम क्या है?
सही उत्तर: C Correct Answer: C
“अमृत” का विलोम “विष” है।
“अमृत” का विलोम “विष” है।
1676
Hindi Language • वाक्य शुद्धि
इनमें से शुद्ध वाक्य कौन-सा है? इनमें से शुद्ध वाक्य कौन-सा है?
सही उत्तर: D Correct Answer: D
“उसने एक ही रोटी खाई” शुद्ध वाक्य है।
“उसने एक ही रोटी खाई” शुद्ध वाक्य है।
1677
Hindi Language • अपठित गद्यांश
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

वह नदी के पास में किसे देख रहा था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

वह नदी के पास में किसे देख रहा था?
सही उत्तर: D Correct Answer: D
गद्यांश के अनुसार, अहमद ने नदी के पास एक मुर्गी देखी थी।
गद्यांश के अनुसार, अहमद ने नदी के पास एक मुर्गी देखी थी।
1678
Hindi Language • अपठित गद्यांश
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद का घर कहाँ था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद का घर कहाँ था?
सही उत्तर: B Correct Answer: B
अहमद का घर श्रीनगर में था।
अहमद का घर श्रीनगर में था।
1679
Hindi Language • अपठित गद्यांश
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद के बेटे का क्या नाम था?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

अहमद के बेटे का क्या नाम था?
सही उत्तर: D Correct Answer: D
गद्यांश में अहमद के पुत्र का नाम मुन्नू बताया गया है।
गद्यांश में अहमद के पुत्र का नाम मुन्नू बताया गया है।
1680
Hindi Language • अपठित गद्यांश
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

उसकी पत्नी क्या सिलाना चाहती थी?
गद्यांश: “मुर्गी की कीमत”

अहमद नाम का एक कश्मीरी युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र को छोड़कर कुछ रुपए कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने ही बचा पाया था।

वह घर जाना चाहता था, किंतु घर कैसे जाए? उसकी बीवी ने कहा था—पैसा ज्यादा न खर्चो। कम-से-कम इतने रुपए जमा करके ही आना कि मैं एक नया सिल्कन सिलवा सकूँ। अहमद ने बचत करने का बहुत प्रयास किया, किंतु घर आने से अधिक जमा नहीं कर पाया था। उसने घर जाने का फैसला कर लिया था, किंतु सोच रहा था—खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है।

वह झेलम नदी के पास गोल-मटोल पंखों वाली मुर्गी को देख रहा था। उसने सोचा कि वह उस मुर्गी को ही खरीद लेगा। घर में बीवी और बच्चे भी उसे देखेंगे; आवश्यकता पड़ने पर उसे पकाया और खाया भी जा सकता है। उसने बारह आने में मुर्गी खरीद ली और उसे हाथ में उठाकर चलने लगा। चलते-चलते थकने के कारण वह एक स्थान पर बैठ गया। अचानक उसे नींद आ गई। जागने पर उसने देखा कि मुर्गी मर गई है। यह देखकर वह रोने लगा।

अहमद नाम का एक गरीब युवक था। श्रीनगर में उसका घर था। वह अपनी बीवी और नन्हे पुत्र मुन्नू को छोड़कर कुछ रुपये कमाने के लिए गुलमर्ग आया था। पाँच महीने तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह केवल बारह आने की बचत कर पाया था। वह घर जाना चाहता था, किंतु सोचता था कि खाली हाथ घर जाना ठीक नहीं है। उसकी पत्नी ने कहा था कि पैसा बचाकर लाना ताकि वह एक नया फिरन सिलवा सके। अहमद ने एक मुर्गी खरीदी। बाद में उसे पता चला कि मुर्गी मर चुकी है, तो वह बहुत दुखी हुआ और जोर-जोर से रोने लगा।

उसकी पत्नी क्या सिलाना चाहती थी?
सही उत्तर: B Correct Answer: B
अहमद की पत्नी एक नया फिरन सिलवाना चाहती थी।
अहमद की पत्नी एक नया फिरन सिलवाना चाहती थी।

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