1661 Hindi Language • वाक्य शुद्धि इनमें से अशुद्ध रूप कौन-सा है? इनमें से अशुद्ध रूप कौन-सा है? A. कृपया दो दिन का अवकाश प्रदान करें। कृपया दो दिन का अवकाश प्रदान करें। B. वह प्रातःकाल व्यायाम करता है। वह प्रातःकाल व्यायाम करता है। C. मैं यह बात प्रमाण सहित कह सकती है। मैं यह बात प्रमाण सहित कह सकती है। D. उसके पिता सज्जन आदमी हैं। उसके पिता सज्जन आदमी हैं। उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C “मैं” के साथ “कह सकती हूँ” होना चाहिए, “कह सकती है” नहीं। “मैं” के साथ “कह सकती हूँ” होना चाहिए, “कह सकती है” नहीं।
1662 Hindi Language • वचन “रात” का वचन बदलिए। “रात” का वचन बदलिए। A. रातें रातें B. राता राता C. रातों रातों D. रातो रातो उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: A Correct Answer: A “रात” का बहुवचन “रातें” होता है। “रात” का बहुवचन “रातें” होता है।
1663 Hindi Language • सर्वनाम जो धोखा भी करेगा—रेखांकित शब्द सर्वनाम का कौन-सा भेद है? जो धोखा भी करेगा—रेखांकित शब्द सर्वनाम का कौन-सा भेद है? A. निश्चयवाचक सर्वनाम निश्चयवाचक सर्वनाम B. संबंधवाचक सर्वनाम संबंधवाचक सर्वनाम C. निजवाचक निजवाचक D. पुरुषवाचक पुरुषवाचक उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B “जो” का संबंध आगे आने वाले कथन से है; इसलिए यह संबंधवाचक सर्वनाम है। “जो” का संबंध आगे आने वाले कथन से है; इसलिए यह संबंधवाचक सर्वनाम है।
1664 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म तथा दान-ध्यान में रुचि रखता था और लोगों को कर्ज भी देता था। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु उसके व्यवहार में स्वार्थ भी था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में वह अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।सेठ बनारसीदास ने क्या खोया था? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म तथा दान-ध्यान में रुचि रखता था और लोगों को कर्ज भी देता था। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु उसके व्यवहार में स्वार्थ भी था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में वह अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।सेठ बनारसीदास ने क्या खोया था? A. माता माता B. बेटा बेटा C. भिखारिन भिखारिन D. पिता पिता उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B गद्यांश के अनुसार, सेठ बनारसीदास ने अपने बेटे को खोया था। गद्यांश के अनुसार, सेठ बनारसीदास ने अपने बेटे को खोया था।
1665 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म तथा दान-ध्यान में रुचि रखता था और लोगों को कर्ज भी देता था। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु उसके व्यवहार में स्वार्थ भी था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में वह अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।अंगी का व्यवसाय क्या था? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म तथा दान-ध्यान में रुचि रखता था और लोगों को कर्ज भी देता था। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु उसके व्यवहार में स्वार्थ भी था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में वह अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।अंगी का व्यवसाय क्या था? A. भिक्षा माँगना भिक्षा माँगना B. चोरी करना चोरी करना C. दान करना दान करना D. लेन-देन करना लेन-देन करना उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: A Correct Answer: A गद्यांश में अंगी को भिखारिन बताया गया है। गद्यांश में अंगी को भिखारिन बताया गया है।
1666 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास के पास किसने अपना पैसा जमा किया था? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास के पास किसने अपना पैसा जमा किया था? A. बालक बालक B. अंगी अंगी C. सेठ सेठ D. काशी के व्यापारी लोग काशी के व्यापारी लोग उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D गद्यांश के अनुसार, काशी के व्यापारी लोग अपना धन सेठ बनारसीदास के पास जमा करते थे। गद्यांश के अनुसार, काशी के व्यापारी लोग अपना धन सेठ बनारसीदास के पास जमा करते थे।
1667 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।इनमें से कौन-सा गुण सेठ बनारसीदास के व्यक्तित्व से संबंधित नहीं है? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।इनमें से कौन-सा गुण सेठ बनारसीदास के व्यक्तित्व से संबंधित नहीं है? A. स्वार्थी स्वार्थी B. दयालु दयालु C. दानी दानी D. परोपकारी परोपकारी उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D सेठ बनारसीदास के व्यवहार में स्वार्थ था; उसे वास्तविक परोपकारी नहीं बताया गया है। सेठ बनारसीदास के व्यवहार में स्वार्थ था; उसे वास्तविक परोपकारी नहीं बताया गया है।
1668 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास दिन के कितने बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास दिन के कितने बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था? A. पूरे पहर पूरे पहर B. सुबह सुबह C. दस बजे दस बजे D. बारह बजे बारह बजे उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D गद्यांश में बनारसीदास के दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगे रहने का उल्लेख है। गद्यांश में बनारसीदास के दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगे रहने का उल्लेख है।
1669 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास किसके मोह के कारण स्वार्थी कहलाया? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति था। वह धर्म-कर्म और दान-ध्यान में रुचि रखता था तथा लोगों को कर्ज भी देता था। वह दिन के बारह बजे तक दान-ध्यान में लगा रहता था। काशी के व्यापारी लोग अपना धन उसके पास जमा करते थे। बाहरी रूप से वह दयालु और धर्मी दिखाई देता था, परंतु वास्तव में वह व्यापारी, साहूकार और स्वार्थी व्यक्ति था। अंगी एक भिखारिन थी। वह अपने बेटे के इलाज के लिए सेठ बनारसीदास से पैसे लेने की प्रार्थना करती है, परंतु सेठ उसे ठोकर देकर भगा देता है। बाद में अंगी अपने बेटे को लेकर फिर से उसके घर आती है और सेठ अपने खोए हुए बेटे की पहचान करता है।बनारसीदास किसके मोह के कारण स्वार्थी कहलाया? A. माता-पिता माता-पिता B. भाई-बहन भाई-बहन C. चाचा-चाची चाचा-चाची D. पुत्र मोह पुत्र मोह उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D पुत्र के प्रति मोह के कारण बनारसीदास का स्वार्थी पक्ष सामने आता है। पुत्र के प्रति मोह के कारण बनारसीदास का स्वार्थी पक्ष सामने आता है।
1670 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास कहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति थे? गद्यांश: “माता का हृदय”सेठ बनारसीदास काशी का प्रसिद्ध व्यक्ति है। वह बहुत बड़ा देव-भक्त और धर्मात्मा कहा जाता है। धर्म में उसकी बहुत रुचि है। दिन के बारह बजे तक वह स्नान-ध्यान में लगा रहता है। ब्राह्मणों को दान देता है। साथ ही लोगों के धन को भी धरोहर के रूप में अपने पास जमा करता है। कई भिखारी उसके पास अपना धन जमा कर जाते हैं।सेठ इस रूप में एक धर्मी-कर्मी, सदाचारी और समाज-सेवी व्यक्ति बनता है। परन्तु जब वह अंधी भिखारिन के जमा पैसे को देने से इनकार कर देता है, तो उसका लोभी और कमीना रूप सामने आता है। अंधी जब अपने बेटे के इलाज के लिए बनारसीदास से पैसे लौटा देने की प्रार्थना करती है, तो वह उसे दुख देकर चले जाने को कहता है।जब अंधी बेटे को साथ लेकर सेठ बनारसीदास के घर जाती है, तो वह उसको अपने खोए हुए बेटे के रूप में पहचानता है। वह अंधी की गोद से उसे खींच लेता है और डॉक्टर को बुलाता है। इस घटना से सेठ बनारसीदास का दूसरा रूप सामने आता है। अतः सेठ को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अंधी के पैसे लौटाता है। लेकिन अंधी पैसे लिए बगैर ही चली जाती है और उसके घर पछतावा करता है।कहानी में सेठ की धनलिप्सा, सहृदयता, दया, ममता और प्राकृतिक प्रवृत्ति सामने आती है। परन्तु वास्तव में सेठ एक व्यापारी, मानवीय, दयी और स्वार्थी व्यक्ति है। अंधी के सामने दुःखते में भी उसका स्वार्थ छिपा हुआ है।सेठ बनारसीदास कहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति थे? A. हरिद्वार हरिद्वार B. ऋषिकेश ऋषिकेश C. काशी काशी D. मद्रास मद्रास उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C गद्यांश के अनुसार, सेठ बनारसीदास काशी के प्रसिद्ध व्यक्ति थे। गद्यांश के अनुसार, सेठ बनारसीदास काशी के प्रसिद्ध व्यक्ति थे।