1641 Hindi Language • मुहावरे “गले लगाना” मुहावरे का अर्थ क्या है? “गले लगाना” मुहावरे का अर्थ क्या है? A. गला दबाना गला दबाना B. मारने की कोशिश करना मारने की कोशिश करना C. प्रेमपूर्वक अपनाना प्रेमपूर्वक अपनाना D. प्रेम करना प्रेम करना उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C “गले लगाना” का अर्थ प्रेमपूर्वक अपनाना या स्नेह देना है। “गले लगाना” का अर्थ प्रेमपूर्वक अपनाना या स्नेह देना है।
1642 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।शबीराम की सदानंद के पैसे लौटाने में मानसिकता क्या थी? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।शबीराम की सदानंद के पैसे लौटाने में मानसिकता क्या थी? A. पैसे लौटाने का मन नहीं था पैसे लौटाने का मन नहीं था B. पैसे लौटाने का मन पूर्ण रूप से था पैसे लौटाने का मन पूर्ण रूप से था C. पैसे सदानंद के पूछने पर देने का मन था पैसे सदानंद के पूछने पर देने का मन था D. उसे पैसे लौटाने का आधा मन था उसे पैसे लौटाने का आधा मन था उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B गद्यांश के अनुसार, शबीराम पैसे लौटाना चाहते थे, किंतु लौटा नहीं पा रहे थे। गद्यांश के अनुसार, शबीराम पैसे लौटाना चाहते थे, किंतु लौटा नहीं पा रहे थे।
1643 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे? A. एक सौ एक सौ B. दो सौ दो सौ C. तीन सौ तीन सौ D. पाँच सौ पाँच सौ उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे। लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे।
1644 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे? A. भाई भाई B. बाप-बेटे बाप-बेटे C. मित्र मित्र D. दुश्मन दुश्मन उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है। गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है।
1645 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।शबीराम का पेशा क्या था? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।शबीराम का पेशा क्या था? A. पंडित पंडित B. गुरु गुरु C. कलाकार कलाकार D. व्यापारी व्यापारी उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: A Correct Answer: A शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है। शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है।
1646 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।लाला सदानंद ने मित्र की विवशता देखकर उसे क्या बनाने का सुझाव दिया? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।लाला सदानंद ने मित्र की विवशता देखकर उसे क्या बनाने का सुझाव दिया? A. एल्बम एल्बम B. सी.डी. सी.डी. C. डी.वी.डी. डी.वी.डी. D. आर्टिफैक्ट आर्टिफैक्ट उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: A Correct Answer: A गद्यांश के अनुसार, लाला सदानंद ने शबीराम को एल्बम बनाने का सुझाव दिया था। गद्यांश के अनुसार, लाला सदानंद ने शबीराम को एल्बम बनाने का सुझाव दिया था।
1647 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।सदानंद के चरित्र से असंबंधित कथन कौन-सा है? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।सदानंद के चरित्र से असंबंधित कथन कौन-सा है? A. महान महान B. उपकारी उपकारी C. उदार उदार D. कृपण कृपण उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D सदानंद का चरित्र उदार और उपकारी था, कृपण नहीं। सदानंद का चरित्र उदार और उपकारी था, कृपण नहीं।
1648 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।सदानंद ने एल्बम को किसके यहाँ से मंगवाने की बात कही? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।सदानंद ने एल्बम को किसके यहाँ से मंगवाने की बात कही? A. शबीराम के यहाँ से शबीराम के यहाँ से B. सदानंद के यहाँ से सदानंद के यहाँ से C. बाजार से बाजार से D. कलकत्ता के किसी सेठ से कलकत्ता के किसी सेठ से उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: D Correct Answer: D लाला सदानंद ने कहा कि एल्बम कलकत्ता के किसी सेठ के यहाँ से मंगवाया गया है। लाला सदानंद ने कहा कि एल्बम कलकत्ता के किसी सेठ के यहाँ से मंगवाया गया है।
1649 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।लाला सदानंद का व्यक्तित्व कैसा था? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।लाला सदानंद का व्यक्तित्व कैसा था? A. क्रूर क्रूर B. उदार उदार C. कंजूस कंजूस D. कठोर कठोर उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: B Correct Answer: B गद्यांश में लाला सदानंद को उदार चरित्र वाला व्यक्ति बताया गया है। गद्यांश में लाला सदानंद को उदार चरित्र वाला व्यक्ति बताया गया है।
1650 Hindi Language • अपठित गद्यांश गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।एल्बम को वास्तव में किसने खरीदा था? गद्यांश: “एल्बम”लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।एल्बम को वास्तव में किसने खरीदा था? A. शबीराम शबीराम B. कलकत्ता का सेठ कलकत्ता का सेठ C. सदानंद सदानंद D. पुरोहित पुरोहित उत्तर और व्याख्या देखें Show answer and explanation सही उत्तर: C Correct Answer: C गद्यांश के अनुसार, एल्बम वास्तव में लाला सदानंद ने स्वयं खरीदा था। गद्यांश के अनुसार, एल्बम वास्तव में लाला सदानंद ने स्वयं खरीदा था।