MCQs for JSSC

महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। उत्तर, व्याख्या, विषय और परीक्षा टैग के साथ।

MCQs for JSSC

श्रेणी: | परीक्षा: JSSC

1641
Hindi Grammar • मुहावरे
“अपना उल्लू सीधा करना” मुहावरे का सही अर्थ क्या है? “अपना उल्लू सीधा करना” मुहावरे का सही अर्थ क्या है?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
“अपना उल्लू सीधा करना” का अर्थ अपने स्वार्थ की सिद्धि करना है।
“अपना उल्लू सीधा करना” का अर्थ अपने स्वार्थ की सिद्धि करना है।
1642
Hindi Vocabulary • Synonyms
“इन्द्र” का पर्याय इनमें से कौन-सा नहीं है? “इन्द्र” का पर्याय इनमें से कौन-सा नहीं है?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
देवराज, सुरेश और सुरपति इन्द्र के पर्याय हैं; “ईश” इन्द्र का पर्याय नहीं है।
देवराज, सुरेश और सुरपति इन्द्र के पर्याय हैं; “ईश” इन्द्र का पर्याय नहीं है।
1643
Hindi Grammar • Samas
“कुल का पति” का समस्तपद इनमें से कौन-सा है? “कुल का पति” का समस्तपद इनमें से कौन-सा है?
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सही उत्तर: C Correct Answer: C
“कुल का पति” का समस्तपद कुलपति है।
“कुल का पति” का समस्तपद कुलपति है।
1644
Hindi Grammar • Sandhi
“संग्रहालय” का संधि-विच्छेद रूप क्या है? “संग्रहालय” का संधि-विच्छेद रूप क्या है?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
“संग्रहालय” का सही विग्रह संग्रह + आलय है।
“संग्रहालय” का सही विग्रह संग्रह + आलय है।
1645
Hindi Grammar • Prefix and Suffix
“हमसफर” शब्द में उपसर्ग कौन-सा है? “हमसफर” शब्द में उपसर्ग कौन-सा है?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
“हमसफर” में “हम” उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त है।
“हमसफर” में “हम” उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त है।
1646
Hindi Grammar • मुहावरे
“गले लगाना” मुहावरे का अर्थ क्या है? “गले लगाना” मुहावरे का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर: C Correct Answer: C
“गले लगाना” का अर्थ प्रेमपूर्वक अपनाना या स्नेह देना है।
“गले लगाना” का अर्थ प्रेमपूर्वक अपनाना या स्नेह देना है।
1647
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम की सदानंद के पैसे लौटाने में मानसिकता क्या थी?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम की सदानंद के पैसे लौटाने में मानसिकता क्या थी?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
गद्यांश के अनुसार, शबीराम पैसे लौटाना चाहते थे, किंतु लौटा नहीं पा रहे थे।
गद्यांश के अनुसार, शबीराम पैसे लौटाना चाहते थे, किंतु लौटा नहीं पा रहे थे।
1648
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे?
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सही उत्तर: D Correct Answer: D
लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे।
लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे।
1649
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे?
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सही उत्तर: C Correct Answer: C
गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है।
गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है।
1650
Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम का पेशा क्या था?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम का पेशा क्या था?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: A Correct Answer: A
शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है।
शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है।

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