Reading Comprehension MCQs

महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। उत्तर, व्याख्या, विषय और परीक्षा टैग के साथ।

Reading Comprehension MCQs

श्रेणी: Hindi | विषय: Reading Comprehension

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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

“छाती फाड़-फाड़कर काम करना” मुहावरे का अर्थ क्या है?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

“छाती फाड़-फाड़कर काम करना” मुहावरे का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
इसका अर्थ बहुत मेहनत और लगन से काम करना है।
इसका अर्थ बहुत मेहनत और लगन से काम करना है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए किसका सहारा लेती थीं?
गद्यांश: “अकेली”

सोमा बुआ एक सामाजिक औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं।

उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। बैठ, ब्याह और मुंडन में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख में हाथ बँटाती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं।

किसी के घर मुंडन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो, जन्म हो या मृत्यु भी हो, वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और हाथ बँटाकर काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे बेफिक्र होने से बचा लिया।

सोमा बुआ एक ग्रामीण औरत थीं। बेटे की मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति की पूरी सेवा करती थीं। शेष ग्यारह महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के सुख-दुःख में हाथ बँटाती थीं। किसी के घर दुःख हो, खुशी हो, बेटे का मुंडन हो, शादी हो या कोई अन्य अवसर—वे बिना बुलाए पहुँच जाती थीं और काम करती थीं। किशोरी लाल के बेटे के मुंडन में भी उन्होंने सारा काम स्वयं संभालकर उसे व्यवस्थित किया था।

सोमा बुआ अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए किसका सहारा लेती थीं?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: D Correct Answer: D
वे अपने आस-पास के पड़ोसियों का सहारा लेती थीं।
वे अपने आस-पास के पड़ोसियों का सहारा लेती थीं।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
निम्न अनुच्छेद को पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें। (82-91)

“अकेली”

सीमा बुआ एक सामान्य श्रेणी की बेटी थीं। बेटे के मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। शेष ग्यारह-महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख के साथ बैठती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं। किसी के घर मुंडन हो, शादी हो, जनेऊ हो, भारी हो, बीमारी हो या सुख भी हो वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और इतना फटाफट काम करती थीं। किसी के घर बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं सँभालकर उसे व्यवस्थित होने से बचा लिया।


इनमें से किस कार्यक्रम में सीमा बुआ काम नहीं देती थीं?
निम्न अनुच्छेद को पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें। (82-91)

“अकेली”

सीमा बुआ एक सामान्य श्रेणी की बेटी थीं। बेटे के मृत्यु और पति के घर-बार छोड़ देने के बाद वे एकदम अकेली हो गई थीं। अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास के पड़ोस वालों का ही सहारा लेती थीं। उनके पति साल में एक महीने के लिए उनके पास आते थे। उस समय वे पति के प्रति पूर्ण सेवा-भाव रखती थीं। शेष ग्यारह-महीनों में वे पास-पड़ोस वालों के दुःख-सुख के साथ बैठती थीं। उनके दुःख-सुख को अपना दुःख-सुख मानती थीं। किसी के घर मुंडन हो, शादी हो, जनेऊ हो, भारी हो, बीमारी हो या सुख भी हो वे बिना बुलाए ही पहुँच जाती थीं और इतना फटाफट काम करती थीं। किसी के घर बेटे के मुंडन में उन्होंने सारा काम स्वयं सँभालकर उसे व्यवस्थित होने से बचा लिया।


इनमें से किस कार्यक्रम में सीमा बुआ काम नहीं देती थीं?
सेव करें Save सेव्ड Saved
सही उत्तर: B Correct Answer: B
अनुच्छेद में मुंडन, शादी और अन्य सामाजिक अवसरों पर सीमा बुआ द्वारा सहायता करने का उल्लेख है। “सावन” किसी कार्यक्रम का उल्लेख नहीं है।
अनुच्छेद में मुंडन, शादी और अन्य सामाजिक अवसरों पर सीमा बुआ द्वारा सहायता करने का उल्लेख है। “सावन” किसी कार्यक्रम का उल्लेख नहीं है।

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