Reading Comprehension MCQs

महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। उत्तर, व्याख्या, विषय और परीक्षा टैग के साथ।

Reading Comprehension MCQs

श्रेणी: Hindi | विषय: Reading Comprehension

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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “रिश्वत की कमाई”

मिस्टर वागची पुलिस सुपरिंटेंडेंट था। वह एक बड़ा सरकारी अधिकारी था, परंतु उसके परिवार की दशा बहुत दयनीय थी। उसकी वर्तमान पत्नी मनोरोगी थी और हमेशा चारपाई पर पड़ी रहती थी। पहली पत्नी की पाँच बेटियाँ थीं, जो इलाहाबाद के किसी स्कूल में पढ़ रही थीं। उनके खर्च के लिए वागची को अपना आधा वेतन भेजना पड़ता था। उनकी दवाइयों की चिंता भी उनको सताती रहती थी। वागची रोजाना एक बोतल शराब पीता था। रिश्वत की कमाई उन्हें फलती नहीं थी। कोई-न-कोई नुकसान हो जाता था। जितनी रिश्वत आती थी उसमें दुगुना खर्च हो जाता था। उसके तीन पुत्र बाल्यावस्था में ही मर चुके थे। चौथा अक्सर बीमार हो जाता था। खर्च इतने अधिक थे कि वागची की पत्नी बच्चे के लिए ५०-६० रुपये का खिलौना मंगाने में भी असमर्थ थी। वागची और उसकी पत्नी अपने बेटे के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। इस प्रकार वागची का परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह टूटा हुआ था।

वागची किस प्रकार के अधिकारी थे?
गद्यांश: “रिश्वत की कमाई”

मिस्टर वागची पुलिस सुपरिंटेंडेंट था। वह एक बड़ा सरकारी अधिकारी था, परंतु उसके परिवार की दशा बहुत दयनीय थी। उसकी वर्तमान पत्नी मनोरोगी थी और हमेशा चारपाई पर पड़ी रहती थी। पहली पत्नी की पाँच बेटियाँ थीं, जो इलाहाबाद के किसी स्कूल में पढ़ रही थीं। उनके खर्च के लिए वागची को अपना आधा वेतन भेजना पड़ता था। उनकी दवाइयों की चिंता भी उनको सताती रहती थी। वागची रोजाना एक बोतल शराब पीता था। रिश्वत की कमाई उन्हें फलती नहीं थी। कोई-न-कोई नुकसान हो जाता था। जितनी रिश्वत आती थी उसमें दुगुना खर्च हो जाता था। उसके तीन पुत्र बाल्यावस्था में ही मर चुके थे। चौथा अक्सर बीमार हो जाता था। खर्च इतने अधिक थे कि वागची की पत्नी बच्चे के लिए ५०-६० रुपये का खिलौना मंगाने में भी असमर्थ थी। वागची और उसकी पत्नी अपने बेटे के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। इस प्रकार वागची का परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह टूटा हुआ था।

वागची किस प्रकार के अधिकारी थे?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
गद्यांश के अनुसार, वागची एक बड़ा सरकारी अधिकारी था।
गद्यांश के अनुसार, वागची एक बड़ा सरकारी अधिकारी था।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “रिश्वत की कमाई”

मिस्टर वागची पुलिस सुपरिंटेंडेंट था। वह एक बड़ा सरकारी अधिकारी था, परंतु उसके परिवार की दशा बहुत दयनीय थी। उसकी वर्तमान पत्नी मनोरोगी थी और हमेशा चारपाई पर पड़ी रहती थी। पहली पत्नी की पाँच बेटियाँ थीं, जो इलाहाबाद के किसी स्कूल में पढ़ रही थीं। उनके खर्च के लिए वागची को अपना आधा वेतन भेजना पड़ता था। उनकी दवाइयों की चिंता भी उनको सताती रहती थी। वागची रोजाना एक बोतल शराब पीता था। रिश्वत की कमाई उन्हें फलती नहीं थी। कोई-न-कोई नुकसान हो जाता था। जितनी रिश्वत आती थी उसमें दुगुना खर्च हो जाता था। उसके तीन पुत्र बाल्यावस्था में ही मर चुके थे। चौथा अक्सर बीमार हो जाता था। खर्च इतने अधिक थे कि वागची की पत्नी बच्चे के लिए ५०-६० रुपये का खिलौना मंगाने में भी असमर्थ थी। वागची और उसकी पत्नी अपने बेटे के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। इस प्रकार वागची का परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह टूटा हुआ था।

वागची दिन में कितनी बोतल शराब पीता था?
गद्यांश: “रिश्वत की कमाई”

मिस्टर वागची पुलिस सुपरिंटेंडेंट था। वह एक बड़ा सरकारी अधिकारी था, परंतु उसके परिवार की दशा बहुत दयनीय थी। उसकी वर्तमान पत्नी मनोरोगी थी और हमेशा चारपाई पर पड़ी रहती थी। पहली पत्नी की पाँच बेटियाँ थीं, जो इलाहाबाद के किसी स्कूल में पढ़ रही थीं। उनके खर्च के लिए वागची को अपना आधा वेतन भेजना पड़ता था। उनकी दवाइयों की चिंता भी उनको सताती रहती थी। वागची रोजाना एक बोतल शराब पीता था। रिश्वत की कमाई उन्हें फलती नहीं थी। कोई-न-कोई नुकसान हो जाता था। जितनी रिश्वत आती थी उसमें दुगुना खर्च हो जाता था। उसके तीन पुत्र बाल्यावस्था में ही मर चुके थे। चौथा अक्सर बीमार हो जाता था। खर्च इतने अधिक थे कि वागची की पत्नी बच्चे के लिए ५०-६० रुपये का खिलौना मंगाने में भी असमर्थ थी। वागची और उसकी पत्नी अपने बेटे के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। इस प्रकार वागची का परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह टूटा हुआ था।

वागची दिन में कितनी बोतल शराब पीता था?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
गद्यांश में वागची के रोजाना एक बोतल शराब पीने का उल्लेख है।
गद्यांश में वागची के रोजाना एक बोतल शराब पीने का उल्लेख है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “रिश्वत की कमाई”

मिस्टर वागची पुलिस सुपरिंटेंडेंट था। वह एक बड़ा सरकारी अधिकारी था, परंतु उसके परिवार की दशा बहुत दयनीय थी। उसकी वर्तमान पत्नी मनोरोगी थी और हमेशा चारपाई पर पड़ी रहती थी। पहली पत्नी की पाँच बेटियाँ थीं, जो इलाहाबाद के किसी स्कूल में पढ़ रही थीं। उनके खर्च के लिए वागची को अपना आधा वेतन भेजना पड़ता था। उनकी दवाइयों की चिंता भी उनको सताती रहती थी। वागची रोजाना एक बोतल शराब पीता था। रिश्वत की कमाई उन्हें फलती नहीं थी। कोई-न-कोई नुकसान हो जाता था। जितनी रिश्वत आती थी उसमें दुगुना खर्च हो जाता था। उसके तीन पुत्र बाल्यावस्था में ही मर चुके थे। चौथा अक्सर बीमार हो जाता था। खर्च इतने अधिक थे कि वागची की पत्नी बच्चे के लिए ५०-६० रुपये का खिलौना मंगाने में भी असमर्थ थी। वागची और उसकी पत्नी अपने बेटे के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। इस प्रकार वागची का परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह टूटा हुआ था।

वागची की बेटियाँ कहाँ पढ़ती थीं?
गद्यांश: “रिश्वत की कमाई”

मिस्टर वागची पुलिस सुपरिंटेंडेंट था। वह एक बड़ा सरकारी अधिकारी था, परंतु उसके परिवार की दशा बहुत दयनीय थी। उसकी वर्तमान पत्नी मनोरोगी थी और हमेशा चारपाई पर पड़ी रहती थी। पहली पत्नी की पाँच बेटियाँ थीं, जो इलाहाबाद के किसी स्कूल में पढ़ रही थीं। उनके खर्च के लिए वागची को अपना आधा वेतन भेजना पड़ता था। उनकी दवाइयों की चिंता भी उनको सताती रहती थी। वागची रोजाना एक बोतल शराब पीता था। रिश्वत की कमाई उन्हें फलती नहीं थी। कोई-न-कोई नुकसान हो जाता था। जितनी रिश्वत आती थी उसमें दुगुना खर्च हो जाता था। उसके तीन पुत्र बाल्यावस्था में ही मर चुके थे। चौथा अक्सर बीमार हो जाता था। खर्च इतने अधिक थे कि वागची की पत्नी बच्चे के लिए ५०-६० रुपये का खिलौना मंगाने में भी असमर्थ थी। वागची और उसकी पत्नी अपने बेटे के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। इस प्रकार वागची का परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह टूटा हुआ था।

वागची की बेटियाँ कहाँ पढ़ती थीं?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
गद्यांश के अनुसार, वागची की बेटियाँ इलाहाबाद के एक स्कूल में पढ़ रही थीं।
गद्यांश के अनुसार, वागची की बेटियाँ इलाहाबाद के एक स्कूल में पढ़ रही थीं।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम की सदानंद के पैसे लौटाने में मानसिकता क्या थी?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम की सदानंद के पैसे लौटाने में मानसिकता क्या थी?
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सही उत्तर: B Correct Answer: B
गद्यांश के अनुसार, शबीराम पैसे लौटाना चाहते थे, किंतु लौटा नहीं पा रहे थे।
गद्यांश के अनुसार, शबीराम पैसे लौटाना चाहते थे, किंतु लौटा नहीं पा रहे थे।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद जी ने पंडित जी को कितने रुपये कर्ज दिए थे?
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सही उत्तर: D Correct Answer: D
लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे।
लाला सदानंद ने पंडित शबीराम को पाँच सौ रुपये कर्ज दिए थे।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद और पंडित शबीराम के क्या संबंध थे?
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सही उत्तर: C Correct Answer: C
गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है।
गद्यांश में दोनों के बीच आदरपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध दिखाया गया है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम का पेशा क्या था?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

शबीराम का पेशा क्या था?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है।
शबीराम को गद्यांश में पंडित और लाला सदानंद का पुरोहित बताया गया है।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद ने मित्र की विवशता देखकर उसे क्या बनाने का सुझाव दिया?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

लाला सदानंद ने मित्र की विवशता देखकर उसे क्या बनाने का सुझाव दिया?
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सही उत्तर: A Correct Answer: A
गद्यांश के अनुसार, लाला सदानंद ने शबीराम को एल्बम बनाने का सुझाव दिया था।
गद्यांश के अनुसार, लाला सदानंद ने शबीराम को एल्बम बनाने का सुझाव दिया था।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद के चरित्र से असंबंधित कथन कौन-सा है?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद के चरित्र से असंबंधित कथन कौन-सा है?
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सही उत्तर: D Correct Answer: D
सदानंद का चरित्र उदार और उपकारी था, कृपण नहीं।
सदानंद का चरित्र उदार और उपकारी था, कृपण नहीं।
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Reading Comprehension • Reading Comprehension
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद ने एल्बम को किसके यहाँ से मंगवाने की बात कही?
गद्यांश: “एल्बम”

लाला सदानंद एक उदार चरित्र वाले व्यक्ति थे। उनके पुरोहित पंडित शबीराम उनका बहुत आदर करते थे। सदानंद जी ने पंडित जी को पाँच सौ रुपये कर्ज दिया था। शबीराम चाहते हुए भी उसे लौटा नहीं पा रहे थे, किंतु लाला जी कभी उनका तकादा नहीं करते थे।

शबीराम को कर्ज न लौटा पाने के कारण चिंतित देखकर लाला जी ने उन्हें एल्बम बनाने का सुझाव दिया और अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं ही उसे खरीद लिया तथा पंडित शबीराम की सहायता की। लाला जी की बीमारी की अवस्था में पंडित जी को यह पता चला कि असल में लाला सदानंद ने एल्बम खरीदा है और उनका कर्ज चुका नहीं, बल्कि दुगुना हो गया है।

लाला जी ने उनसे सत्य छुपाया और कहा कि एल्बम उन्होंने कलकत्ता के सेठ के यहाँ से मंगवाया है। इस प्रकार लाला सदानंद ने महानता का परिचय दिया। वे शबीराम को और अधिक उपकारी और महान लगने लगे।

सदानंद ने एल्बम को किसके यहाँ से मंगवाने की बात कही?
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सही उत्तर: D Correct Answer: D
लाला सदानंद ने कहा कि एल्बम कलकत्ता के किसी सेठ के यहाँ से मंगवाया गया है।
लाला सदानंद ने कहा कि एल्बम कलकत्ता के किसी सेठ के यहाँ से मंगवाया गया है।

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